बंगाल में 'जादुई' बर्थ सर्टिफिकेट जन्म से पहले ही बन गया प्रमाण पत्र, दो सगे भाइयों की उम्र में महज 26 दिन का अंतर

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 News India Live, Digital Desk: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) अभियान के दौरान कुछ ऐसे दस्तावेज़ सामने आए हैं जिन्होंने विज्ञान और तर्क दोनों को चुनौती दे दी है। चुनाव आयोग (ECI) की स्क्रूटनी में खुलासा हुआ है कि राज्य में कई ऐसे बर्थ सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं जो न केवल फर्जी हैं, बल्कि 'असंभव' भी हैं।

1. जन्म से पहले ही रजिस्ट्रेशन: भ्रष्टाचार का अनोखा नमूना

उत्तर 24 परगना जिले के बारांनगर में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने चुनाव अधिकारियों के होश उड़ा दिए।

अजीबोगरीब मामला: सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार एक व्यक्ति का जन्म 6 मार्च 1993 को हुआ था।

गड़बड़ी: लेकिन जांच में पता चला कि उसका जन्म प्रमाण पत्र उसके पैदा होने से 2 दिन पहले ही (4 मार्च 1993) पंजीकृत कर लिया गया था। यह प्रशासनिक लापरवाही है या किसी बड़े गिरोह का काम, इसकी जांच जारी है।

2. सगे भाइयों की उम्र में सिर्फ 26 दिन का अंतर

कोलकाता के मेटियाब्रुज में एक ही परिवार के दस्तावेजों ने अधिकारियों को हैरान कर दिया।

असंभव तथ्य: दो सगे भाइयों, इरशाद और शेख नउसद की जन्म तिथियों में एक महीने का भी अंतर नहीं है।

रिकॉर्ड: दस्तावेजों के अनुसार एक का जन्म 5 दिसंबर 1990 और दूसरे का 1 जनवरी 1991 दर्ज है। जैविक रूप से (Biologically) एक ही मां से इतनी कम अवधि में दो बच्चों का जन्म नामुमकिन है।

एक ही तारीख का खेल: परिवार के 10 बच्चों में से 4 बच्चों की जन्म तिथि '1 जनवरी' दर्ज पाई गई है।

3. मतदाता सूची में और भी विसंगतियां

चुनाव आयोग को कई और संदिग्ध मामले मिले हैं:

बच्चे बने मतदाता: 2002 की सूची में एक 5 साल के बच्चे को मतदाता दिखाया गया था, जिसने अब संशोधन के लिए आवेदन किया है।

अधूरा डेटा: पूर्व बर्धमान में एक व्यक्ति की जन्म तिथि की जगह केवल साल (X/X/1987) दर्ज मिला है।

नाबालिग वोटर: स्क्रूटनी के दौरान एक मतदाता की उम्र केवल 13 वर्ष पाई गई।

चुनाव आयोग का कड़ा रुख: 'सुपर चेकिंग' शुरू

इन गड़बड़ियों के सामने आने के बाद निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) अब अस्पताल के रिकॉर्ड से इन आंकड़ों की पुष्टि कर रहे हैं।

माइक्रो-ऑब्जर्वर्स तैनात: 8,000 से अधिक माइक्रो-ऑब्जर्वर्स अब घर-घर जाकर सत्यापन कर रहे हैं।

मकसद: आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची से सभी अयोग्य, फर्जी और 'जादुई' नामों को हटाकर एक त्रुटिहीन (Error-free) सूची तैयार करना।