लखनऊ-बरेली का सफर अब होगा और आसान, 250 KM लंबा 6-लेन साइंस कॉरिडोर जोड़ेगा 5 जिलों को

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News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को राज्य के कई महत्वपूर्ण पश्चिमी जिलों से जोड़ने और औद्योगिक विकास को एक नई रफ्तार देने के लिए योगी सरकार ने एक बड़ी और महत्वाकांक्षी परियोजना को हरी झंडी दे दी है। लखनऊ से बरेली तक एक 250 किलोमीटर लंबा, 6-लेन का अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा, जिसे 'साइंस कॉरिडोर' का नाम दिया गया है। यह कॉरिडोर न सिर्फ यात्रा के समय को आधा कर देगा, बल्कि अपने रास्ते में पड़ने वाले सभी जिलों के लिए विकास के नए दरवाजे भी खोलेगा।

क्यों दिया गया 'साइंस कॉरिडोर' का नाम?

इस एक्सप्रेसवे को 'साइंस कॉरिडोर' नाम देने के पीछे एक खास मकसद है। यह एक्सप्रेसवे लखनऊ को बरेली और रामपुर जैसे उन शहरों से जोड़ेगा, जहां फार्मास्यूटिकल (दवा निर्माण), बायोटेक्नोलॉजी और एग्रो-प्रोसेसिंग जैसे विज्ञान-आधारित उद्योग तेजी से विकसित हो रहे हैं। इस कॉरिडोर का उद्देश्य इन उद्योगों के लिए एक तेज और सुगम रास्ता तैयार करना है, ताकि कच्चे माल और तैयार उत्पादों का ट्रांसपोर्टेशन आसानी से हो सके। यह कॉरिडोर इस पूरे क्षेत्र को एक बड़े औद्योगिक गलियारे के रूप में विकसित करने में मदद करेगा।

किन 5 जिलों से होकर गुजरेगा यह कॉरिडोर?

यह महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे कुल पांच महत्वपूर्ण जिलों को आपस में जोड़ेगा:

  1. लखनऊ
  2. हरदोई
  3. शाहजहाँपुर
  4. रामपुर
  5. बरेली

इन जिलों के अलावा, यह कॉरिडोर सीतापुर जैसे आसपास के क्षेत्रों को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाएगा।

क्या होंगे इस कॉरिडोर के फायदे?

  • यात्रा का समय होगा आधा: अभी लखनऊ से बरेली जाने में बस या कार से 6 से 7 घंटे का समय लगता है। इस एक्सप्रेसवे के बन जाने के बाद यह दूरी महज 3 से 3.5 घंटे में पूरी की जा सकेगी, जिससे लोगों का समय और ईंधन दोनों बचेगा।
  • जाम से मिलेगी मुक्ति: यह कॉरिडोर पूरी तरह से नया (ग्रीनफील्ड) बनाया जाएगा, जिसका मतलब है कि यह मौजूदा सड़कों से अलग होगा। इससे शहरों के अंदर लगने वाले ट्रैफिक जाम से पूरी तरह से निजात मिल जाएगी।
  • औद्योगिक विकास को मिलेगी रफ्तार: जैसा कि इसके नाम से ही जाहिर है, यह कॉरिडोर फार्मा, बायो-टेक और कृषि-आधारित उद्योगों को एक बड़ा बूस्ट देगा। उद्योगों के लिए लखनऊ, दिल्ली और अन्य बड़े बाजारों तक पहुंचना आसान हो जाएगा।
  • स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार: एक्सप्रेसवे के निर्माण और इसके किनारे विकसित होने वाले औद्योगिक क्षेत्रों से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे।

जल्द शुरू होगा जमीन अधिग्रहण

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए एक एजेंसी को नियुक्त कर दिया है। रिपोर्ट फाइनल होने के बाद जल्द ही जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस एक्सप्रेसवे के बनने से उत्तर प्रदेश के विकास की कहानी में एक नया अध्याय जुड़ेगा।