दिवाली खत्म, पर लखनऊ की हवा में घुला 'जहर' बाकी है! ठंड के साथ और बढ़ेगा सांसों पर संकट, डॉक्टर बोले- सावधान

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 Lucknow AQI today after Diwali : दिवाली की धूम तो खत्म हो गई, लेकिन अपने पीछे छोड़ गई है जहरीली हवा का ऐसा गुबार, जिससे नवाबों का शहर लखनऊ अब तक उबर नहीं पाया है। दिवाली की रात पटाखों से जो प्रदूषण शुरू हुआ, उसने अब तक शहर की हवा में डेरा डाला हुआ है और लोगों की सांसों में 'जहर' घोल रहा है।

दिवाली के अगले दिन लखनऊ का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 454 के खतरनाक स्तर तक पहुंच गया था, जो 'गंभीर' (Severe) कैटेगरी में आता है। हालांकि, गुरुवार को इसमें थोड़ी गिरावट आई, लेकिन AQI 242 पर बना रहा, जो अब भी 'बहुत खराब' (Very Poor) श्रेणी में है और सेहत के लिए बेहद हानिकारक है।

लखनऊ का कोई कोना नहीं बचा, हर तरफ हवा खराब

शहर का शायद ही कोई ऐसा इलाका हो, जहां की हवा में सुधार दिखा हो।

  • आशियाना, लालबाग, इंदिरानगर, गोमती नगर, चारबाग, हर जगह AQI 250 के पार बना हुआ है।
  • यहां तक कि विपुल खंड, तालकटोरा, निशातगंज और गौतमपल्ली जैसे इलाकों में भी हवा की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई।

अस्पतालों में बढ़ सकती है मरीजों की भीड़: डॉक्टरों की चेतावनी

शहर की इस जहरीली हवा को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बड़ी चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि अगर हवा इसी तरह 'बहुत खराब' बनी रही, तो लोगों में सांस, फेफड़े और आंखों से जुड़ी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा। डॉक्टरों को डर है कि जल्द ही अस्पतालों में सांस की तकलीफ वाले मरीजों की संख्या में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

असली खतरा तो अब आएगा! ठंड बढ़ाएगी मुसीबत

मौसम वैज्ञानिकों ने एक और बड़ी चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि जैसे-जैसे ठंड बढ़ेगी, हवा और भी भारी हो जाएगी। इससे होगा यह कि प्रदूषण के खतरनाक कण हवा में ही फंसकर रह जाएंगे और कहीं नहीं जा पाएंगे, जिससे स्मॉग की परत और भी घनी और जहरीली हो जाएगी।

फिलहाल, लखनऊ में अधिकतम तापमान 34 डिग्री और न्यूनतम 22 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, लेकिन जैसे ही पारा गिरेगा, प्रदूषण का संकट और गहरा सकता है।

क्या कर रहा है प्रशासन?

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमें शहर में लगातार निगरानी कर रही हैं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे कूड़ा या सूखी पत्तियां न जलाएं, बेवजह गाड़ियां न निकालें और पेड़ न काटें। नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर एक अभियान भी शुरू किया गया है, लेकिन जब तक लोग खुद जागरूक नहीं होंगे, तब तक इन कोशिशों का असर दिखना मुश्किल है।

अब लखनऊ वालों को या तो बारिश का इंतजार है या फिर इस जहरीली हवा में सांस लेने की आदत डालने का, क्योंकि ठंड के साथ यह संकट और भी गहराने वाला है।