Lotus Pose Benefits : क्या आपको भी सताता है अनजाना डर और चिंता? रोजाना 10 मिनट करें पद्मासन
News India Live, Digital Desk: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में 'एंजायटी' और 'पैनिक अटैक' एक गंभीर समस्या बन चुके हैं। छोटी-छोटी बातों पर घबराहट होना, भविष्य का डर सताना या मन का अशांत रहना सीधे हमारी कार्यक्षमता को प्रभावित करता है। मनोचिकित्सक अक्सर इसके लिए ध्यान (Meditation) की सलाह देते हैं, और ध्यान की सबसे शक्तिशाली मुद्रा है 'पद्मासन' (Lotus Pose)। प्राचीन ग्रंथों में इसे 'आसनों का राजा' कहा गया है क्योंकि यह मन को शांत कर आंतरिक शक्ति को जगाने की क्षमता रखता है। आइए जानते हैं पद्मासन कैसे आपके डर को खत्म कर सकता है।
1. घबराहट और एंग्जायटी से तुरंत राहत
पद्मासन के दौरान जब हम सीधे बैठते हैं और लंबी गहरी सांसें लेते हैं, तो यह हमारे पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम (Parasympathetic Nervous System) को सक्रिय कर देता है।
फायदा: इससे शरीर में तनाव पैदा करने वाले हार्मोन 'कोर्टिसोल' का स्तर गिरता है और मन तुरंत शांत महसूस करने लगता है।
2. रीढ़ की हड्डी और ऊर्जा का संचार
पद्मासन की मुद्रा में रीढ़ की हड्डी बिल्कुल सीधी रहती है। योग शास्त्र के अनुसार, इससे शरीर के सात चक्रों में ऊर्जा का प्रवाह सुचारू होता है।
फायदा: जब ऊर्जा का संचार सही होता है, तो मस्तिष्क की कोशिकाएं अधिक सक्रिय होती हैं, जिससे एकाग्रता (Concentration) बढ़ती है और नकारात्मक विचार दूर होते हैं।
3. पाचन तंत्र और शारीरिक मजबूती
पद्मासन केवल दिमाग ही नहीं, पेट के लिए भी वरदान है। इस मुद्रा में बैठने से पेट के निचले हिस्से में रक्त का प्रवाह बढ़ता है।
फायदा: यह पाचन क्रिया को तेज करता है और शरीर के निचले अंगों की मांसपेशियों को लचीला बनाता है।
पद्मासन करने का सही तरीका (How to do Lotus Pose)
स्टेप 1: जमीन पर दरी या योगा मैट बिछाकर सीधे बैठ जाएं और पैरों को सामने फैला लें।
स्टेप 2: दाएं पैर को मोड़कर बाईं जांघ पर रखें और बाएं पैर को मोड़कर दाईं जांघ पर इस तरह रखें कि दोनों एड़ियां पेट के पास हों।
स्टेप 3: रीढ़ की हड्डी को एकदम सीधा रखें और दोनों हाथों को 'ज्ञान मुद्रा' में घुटनों पर रखें।
स्टेप 4: आंखें बंद करें और अपनी आती-जाती सांसों पर ध्यान केंद्रित करें।
सावधानियां: इन्हें नहीं करना चाहिए
यद्यपि पद्मासन बेहद लाभकारी है, लेकिन घुटनों के दर्द, साइटिका या टखने की चोट से जूझ रहे लोगों को इसे करने से बचना चाहिए। शुरुआत में यदि आप दोनों पैरों को ऊपर नहीं चढ़ा पा रहे हैं, तो 'अर्ध-पद्मासन' का अभ्यास करें।