Loan Moratorium Update: MSMEs को मिल सकती है बड़ी राहत! ईरान युद्ध के बीच 3 से 6 महीने तक EMI टालने पर विचार कर रही सरकार
मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-इजरायल युद्ध और उसके कारण उपजे वैश्विक ऊर्जा संकट (Energy Crisis) के बीच भारत सरकार उद्योगों को बचाने के लिए एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। CNBC-आवाज़ की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्रालय विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को कर्ज अदायगी में राहत देने के लिए 'लोन मोरेटोरियम' (Loan Moratorium) पर गंभीरता से मंथन कर रहा है। यदि यह प्रस्ताव पास होता है, तो युद्ध से प्रभावित सेक्टर्स को अपनी किश्तें (EMI) चुकाने से कुछ समय के लिए बड़ी राहत मिल सकती है।
3 से 6 महीने की EMI से मिल सकती है 'ऑक्सीजन'
इकोनॉमिक पॉलिसी एडिटर लक्ष्मण राय के अनुसार, सरकार MSMEs को 3 से 6 महीने तक EMI न चुकाने की छूट देने पर विचार कर रही है।
उद्देश्य: ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन में आई बाधाओं से छोटे उद्योगों की कमर टूट रही है। ऐसे में मोरेटोरियम उन्हें वित्तीय 'ऑक्सीजन' देने का काम करेगा।
मांग: देश के बड़े एक्सपोर्टर्स और इंडस्ट्री बॉडीज ने सरकार से इस संकट के दौरान राहत की मांग की थी।
बैंकिंग सेक्टर पर असर: इस फैसले का सीधा असर बैंकों की बैलेंस शीट और एनपीए (NPA) प्रबंधन पर पड़ेगा, इसलिए बैंकिंग रेगुलेटर्स के साथ भी इस पर चर्चा जारी है।
ऊर्जा संकट और आर्थिक बुनियाद की समीक्षा
सरकार वर्तमान में उद्योगों पर बढ़ती ऊर्जा लागत के असर की बारीकी से समीक्षा कर रही है। जहां एक ओर इंडस्ट्री को राहत देने की तैयारी है, वहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर भरोसा जताया है।
मजबूत इकोनॉमी: लोकसभा में एक सवाल के जवाब में वित्त मंत्री ने कहा कि भारत की आर्थिक बुनियाद (Fundamentals) बेहद मजबूत है। पूरी दुनिया हमारे राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) के प्रबंधन की तारीफ कर रही है।
विदेशी मुद्रा भंडार: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) ठोस स्थिति में है, जो किसी भी बाहरी झटके को सहने में सक्षम है।
डॉलर के मुकाबले रुपया: अन्य एशियाई देशों से बेहतर स्थिति
रुपये की गिरावट पर चिंताओं को दूर करते हुए वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारतीय रुपया अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में "बिल्कुल ठीक" चल रहा है।
तुलनात्मक गिरावट: उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण कई एशियाई करेंसी कमजोर हुई हैं।
आंकड़े: जहां दक्षिण कोरियाई वॉन (4.6%), थाई बहत (5.5%) और फिलिपीनी पेसो (4.8%) में बड़ी गिरावट देखी गई है, वहीं रुपये की स्थिति इनके मुकाबले काफी स्थिर है।
बाजार का रुख: वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने भी सदन को बताया कि आरबीआई (RBI) और सरकार करेंसी की चाल पर चौबीसों घंटे नजर रखे हुए हैं।