Currency Market Update: रुपये में रिकॉर्ड गिरावट! पहली बार ₹95 के पार पहुंचा डॉलर; RBI के दखल के बावजूद क्यों नहीं संभली भारतीय करेंसी?
सोमवार का दिन भारतीय मुद्रा (INR) के लिए ऐतिहासिक रूप से उथल-पुथल भरा रहा। डॉलर-रुपये की जोड़ी ने बाजार के सभी अनुमानों को गलत साबित कर दिया। हालांकि रुपया शुरुआती कारोबार में 93.58 पर मजबूती के साथ खुला था, लेकिन दिन चढ़ते-चढ़ते इसने अपनी पूरी बढ़त गंवा दी और इतिहास में पहली बार 95.12 के रिकॉर्ड निचले स्तर को छू लिया। दिन के अंत में यह 94.83 प्रति डॉलर पर लगभग फ्लैट बंद हुआ।
आज 31 मार्च को महावीर जयंती के अवसर पर करेंसी मार्केट और शेयर बाजार बंद हैं, लेकिन सोमवार के इस ड्रामे ने निवेशकों और जानकारों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्यों टूटा रुपया? बाजार के 4 बड़े कारण
बाजार के विशेषज्ञों और डीलरों ने रुपये की इस ऐतिहासिक गिरावट के पीछे निम्नलिखित प्रमुख कारण बताए हैं:
रूसी तेल के लिए डॉलर की भारी डिमांड: अमेरिका द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद पर दी गई 30 दिनों की छूट 5 अप्रैल को खत्म हो रही है। भारतीय रिफाइनरी कंपनियां समुद्र में फंसे तेल को खरीदने के लिए जल्दबाजी में हैं, जिसके कारण डॉलर की मांग अचानक बहुत बढ़ गई है।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें: मिडिल ईस्ट (ईरान-इजरायल) युद्ध के कारण कच्चा तेल $115 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। तेल आयात के लिए डॉलर की जरूरत ने रुपये पर भारी दबाव बनाया।
विदेशी फंड्स की निकासी (FII Outflow): विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से हर दिन लगभग $500 मिलियन निकाल रहे हैं। जब निवेशक पैसा निकालते हैं, तो वे रुपया बेचकर डॉलर खरीदते हैं, जिससे रुपया कमजोर होता है।
एशियाई करेंसी में गिरावट: केवल रुपया ही नहीं, बल्कि वॉन और रिंगगिट जैसी अन्य एशियाई मुद्राएं भी डॉलर के मुकाबले 0.5% तक कमजोर हुई हैं।
RBI का कदम और बैंकों का 'गुस्सा'
रुपये को संभालने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों को डॉलर बेचने के लिए मजबूर किया। बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि RBI दखल नहीं देता, तो रुपया 95.30 के स्तर तक गिर सकता था। हालांकि, इस कदम से बैंकों को प्रति डॉलर 40-50 पैसे का नुकसान उठाना पड़ा, जिससे बैंकिंग सेक्टर में काफी नाराजगी देखी गई।
विशेषज्ञों की राय: "वैश्विक सुनामी से जीतना मुश्किल"
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि RBI वैश्विक मंदी और पश्चिम एशिया युद्ध की 'सुनामी' को अकेले नहीं रोक सकता। कुछ जानकारों का मानना है कि RBI किसी खास लेवल (जैसे ₹95) को डिफेंड नहीं कर रहा था, बल्कि वह बैंकों के डॉलर के जरिए बाजार की मांग पूरी कर रहा था ताकि अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को सुरक्षित रखा जा सके।
आज बाजार की स्थिति (31 मार्च 2026)
आज महावीर जयंती के उपलक्ष्य में BSE और NSE बंद हैं। करेंसी डेरिवेटिव्स और इंटरेस्ट रेट डेरिवेटिव्स में भी आज कोई ट्रेडिंग नहीं होगी। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय संकेतों और युद्ध की स्थिति को देखते हुए बुधवार को जब बाजार खुलेगा, तो रुपये की चाल पर सबकी नजर रहेगी।