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April 05 2026 02:09 am

Domestic Aviation Market: भारतीय आसमान पर केवल दो दिग्गजों का कब्जा! इंडिगो और एयर इंडिया के पास है 91% बाजार, प्रतिस्पर्धा खत्म होने के आसार?

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भारत के घरेलू उड्डयन (Domestic Aviation) क्षेत्र से एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। केंद्र सरकार द्वारा राज्यसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, देश के आसमान पर अब केवल दो बड़े एयरलाइन समूहों—इंडिगो (IndiGo) और एयर इंडिया ग्रुप (Air India Group)-का वर्चस्व स्थापित हो चुका है। ये दोनों समूह मिलकर भारत के कुल घरेलू बाजार के 91 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित कर रहे हैं, जिससे छोटी एयरलाइंस के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

इंडिगो 'किंग', एयर इंडिया दूसरे पायदान पर

नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष के एक सवाल के लिखित जवाब में बाजार हिस्सेदारी (Market Share) का पूरा ब्यौरा पेश किया:

इंडिगो (IndiGo): भारतीय एविएशन मार्केट का निर्विवाद नेता बना हुआ है। जनवरी 2026 में इसकी बाजार हिस्सेदारी 63.6% रही।

एयर इंडिया ग्रुप (Air India, AI Express, Vistara): टाटा समूह के स्वामित्व वाले इस ग्रुप की हिस्सेदारी जनवरी 2026 में 26.5% दर्ज की गई।

अन्य एयरलाइंस: अकासा एयर, स्पाइसजेट और अन्य क्षेत्रीय एयरलाइंस के पास अब बाजार का मात्र 9% हिस्सा ही बचा है।

दिसंबर 2025 का 'क्राइसिस': इंडिगो की 5,689 उड़ानें हुईं रद्द

सरकार ने सदन में इंडिगो द्वारा पिछले साल के अंत में की गई उड़ानों की भारी कटौती का 'कच्चा चिट्ठा' भी खोला। दिसंबर 2025 में एयरलाइन के कुप्रबंधन के कारण लाखों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा:

बड़े पैमाने पर रद्दीकरण: अकेले दिसंबर 2025 में इंडिगो ने 5,689 घरेलू उड़ानें रद्द कीं।

यात्रियों पर असर: दिसंबर के केवल तीन दिनों के भीतर 3.64 लाख से ज्यादा यात्री प्रभावित हुए।

कारण: पायलटों की शेड्यूलिंग में भारी गड़बड़ी और नए 'फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशंस' (FDTL) नियमों का पालन न कर पाना इस संकट की मुख्य वजह रही।

मुआवजे में बहे ₹46 करोड़: रिफंड की स्थिति

उड़ानों के अचानक रद्द होने और यात्रियों के भारी हंगामे के बाद एयरलाइन को अपनी जेब ढीली करनी पड़ी है:

हर्जाना: सरकार के अनुसार, इंडिगो ने प्रभावित यात्रियों को मुआवजे के तौर पर अब तक ₹46.20 करोड़ (4,620.5 लाख रुपये) का भुगतान किया है।

रिफंड: मंत्रालय ने आश्वस्त किया है कि दिसंबर की मास कैंसिलेशन से जुड़े रिफंड प्रोसेस कर दिए गए हैं और पैसे ग्राहकों के मूल पेमेंट मोड में वापस भेज दिए गए हैं।

आंकड़ों के अभाव पर सरकार की घेराबंदी

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चिंताजनक बात यह रही कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के पास कई महत्वपूर्ण डेटा का अभाव दिखा। सरकार ने स्वीकार किया कि उसके पास इस बात का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है कि:

कितने यात्रियों को रिफंड देने से स्पष्ट रूप से मना कर दिया गया।

यात्रियों पर इस संकट का कुल कितना वित्तीय प्रभाव पड़ा।

वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था उपलब्ध न कराए जाने के कारण कितने यात्रियों को खुद के खर्च पर महंगी टिकटें खरीदनी पड़ीं।

विशेषज्ञों की राय: जानकारों का मानना है कि केवल दो समूहों के पास 91% बाजार होने से 'ड्युओपोली' (Duopoly) की स्थिति बन रही है, जिससे भविष्य में हवाई किराए में मनमानी बढ़ोतरी और सेवाओं की गुणवत्ता में कमी देखने को मिल सकती है।