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April 02 2026 07:21 am

Census 2027: जनगणना में लिव-इन जोड़ों को भी माना जाएगा शादीशुदा ,केंद्र सरकार ने जारी किए 33 सवालों के नए नियम

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News India Live, Digital Desk: भारत की आगामी जनगणना 2027 (16वीं जनगणना) सामाजिक बदलाव की एक नई इबारत लिखने जा रही है। केंद्र सरकार द्वारा जारी ताजा दिशा-निर्देशों (FAQs) के अनुसार, यदि कोई जोड़ा 'लिव-इन रिलेशनशिप' में रह रहा है और वे अपने रिश्ते को एक "स्थिर बंधन" (Stable Union) मानते हैं, तो उन्हें जनगणना में 'विवाहित' (Married) माना जाएगा। यह पहली बार है जब भारत की आधिकारिक गणना में सामाजिक यथार्थ को स्वीकार करते हुए लिव-इन कपल्स को विवाहित जोड़ों की श्रेणी में रखने का स्पष्ट विकल्प दिया गया है।

'सेल्फ-एन्यूमरेशन' पोर्टल पर खुला राज सरकार ने सोमवार (30 मार्च 2026) को जनगणना के लिए एक विशेष 'स्व-गणना' (Self-enumeration) पोर्टल लॉन्च किया है। इस पोर्टल पर पूछे गए अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (FAQs) में यह स्पष्ट किया गया है कि प्रगणक (Enumerator) के घर आने पर या खुद ऑनलाइन जानकारी भरते समय यदि कोई कपल खुद को विवाहित बताता है, तो उनसे किसी भी प्रकार के दस्तावेजी सबूत (Marriage Certificate) की मांग नहीं की जाएगी। जो जानकारी नागरिक देंगे, उसे ही अंतिम माना जाएगा।

दो चरणों में होगी देश की पहली 'डिजिटल जनगणना' 2027 की यह जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी, जिसे दो चरणों में पूरा किया जाएगा:

प्रथम चरण (अप्रैल से सितंबर 2026): इसमें 'हाउसलिस्टिंग' (घरों की सूची बनाना) और आवास गणना होगी। इस दौरान कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे, जिनमें घर की स्थिति, सुविधाएं और रहने वाले विवाहित जोड़ों की संख्या शामिल होगी।

द्वितीय चरण (फरवरी 2027): इसमें जनसंख्या की मुख्य गणना होगी, जिसमें नाम, आयु, धर्म, वैवाहिक स्थिति और व्यवसाय जैसे व्यक्तिगत विवरण जुटाए जाएंगे।

क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला? विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों (जहां लंबे समय तक साथ रहने वाले जोड़ों को विवाहित जैसे अधिकार दिए गए हैं) और आधुनिक समाज की बदलती सोच को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। इससे न केवल जनसंख्या के आंकड़े अधिक सटीक होंगे, बल्कि लिव-इन में रहने वाली महिलाओं और बच्चों के अधिकारों के संरक्षण में भी मदद मिलेगी।

जनगणना 2027 के मुख्य आकर्षण:

डिजिटल इंडिया: पहली बार मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के जरिए डेटा इकट्ठा होगा।

स्व-गणना: नागरिक खुद अपना विवरण पोर्टल पर दर्ज कर सकेंगे।

गोपनीयता: जनगणना अधिनियम 1948 के तहत डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा और इसे कोर्ट में साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

शुभंकर (Mascots): इस जनगणना के लिए 'प्रगति' और 'विकास' नाम के दो शुभंकर भी लॉन्च किए गए हैं।