बिहार में टूटेगी शराबबंदी अपनों ने ही बढ़ाई नीतीश कुमार की टेंशन, एनडीए सहयोगियों ने सदन में कर दी बड़ी मांग

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News India Live, Digital Desk: बिहार की राजनीति में एक बार फिर 'शराबबंदी कानून' केंद्र में आ गया है। साल 2016 से लागू इस कानून को लेकर अब बाहर ही नहीं, बल्कि नीतीश कुमार के अपने 'किले' यानी एनडीए (NDA) गठबंधन के अंदर से ही बगावत के सुर सुनाई देने लगे हैं। ताजा घटनाक्रम में एनडीए के सहयोगियों ने सीधे मुख्यमंत्री के सामने ही इस कानून की समीक्षा की मांग रख दी है, जिससे जेडीयू (JDU) खेमे में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

सदन में उठी समीक्षा की मांग

बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान उस वक्त सन्नाटा पसर गया जब राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के विधायक माधव आनंद ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में ही शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग कर दी। आनंद का तर्क है कि अब वक्त आ गया है कि लगभग एक दशक पुराने इस कानून के नफे-नुकसान का आकलन किया जाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री खुद ऐतिहासिक फैसलों के लिए जाने जाते हैं, इसलिए उन्हें इसकी जमीनी हकीकत देखनी चाहिए।

मांझी और कुशवाहा का भी मिला साथ

सिर्फ माधव आनंद ही नहीं, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी इस सुर में सुर मिलाया है। मांझी ने गया में मीडिया से बात करते हुए साफ कहा कि शराबबंदी के कारण बिहार सरकार को भारी वित्तीय नुकसान हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में शराबबंदी पूरी तरह फेल है और होम डिलीवरी का धंधा फल-फूल रहा है। मांझी के मुताबिक, इस कानून की सबसे ज्यादा मार गरीबों और वंचित वर्गों पर पड़ रही है, जिन्हें पुलिस मामूली आरोप में जेल भेज रही है।

जेडीयू का सख्त रुख: 'समीक्षा का सवाल ही नहीं'

एनडीए सहयोगियों की इस मांग पर जेडीयू ने कड़ा ऐतराज जताया है। जेडीयू के वरिष्ठ मंत्री विजय कुमार चौधरी और प्रवक्ता नीरज कुमार ने दो टूक शब्दों में कहा कि शराबबंदी का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया था और यह राज्य में मजबूती से लागू रहेगा। जेडीयू का कहना है कि जो लोग इस कानून पर सवाल उठा रहे हैं, वे शायद दूसरे राज्यों की ओर देख रहे हैं जहां शराब उपलब्ध है, लेकिन बिहार में यह सामाजिक सुधार का एक बड़ा स्तंभ है।

विपक्ष को मिला मुद्दा

एनडीए के भीतर की इस खींचतान ने विपक्षी दलों को सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया है। आरजेडी (RJD) ने मुख्यमंत्री से जवाब मांगते हुए कहा कि जब सरकार के अपने विधायक ही कानून को फेल बता रहे हैं, तो नीतीश कुमार अपनी जिद पर क्यों अड़े हैं?

बिहार में 2025 के चुनावों से पहले शराबबंदी पर छिड़ी यह जंग आने वाले दिनों में गठबंधन की एकता और चुनावी समीकरणों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।