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April 14 2026 11:36 am

बांग्लादेश तो छोड़िये, चीन और पाकिस्तान भी मिल जाएं तो भारत का चिकन नेक नहीं काट पाएंगे सेना ने बनाया अभेद्य किला

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News India Live, Digital Desk : रक्षा जगत और बॉर्डर से एक ऐसी खबर आई है जो आपको सुकून भी देगी और गर्व भी कराएगी। हम सबने बचपन से सुना हकि भारत के नक्शे पर जो पतली सी गर्दन है जिसे हम 'चिकन नेक' (Chicken's Neck) या सिलीगुड़ी कॉरिडोर कहते हैं वो हमारी सबसे बड़ी कमजोरी है। हमेशा डर रहता था कि अगर दुश्मन ने वहां हमला किया, तो पूरा उत्तर-पूर्व (North-East) भारत से कट जाएगा।

लेकिन अब आप बेफिक्र हो जाइए। साल 2025 खत्म होते-होते भारतीय सेना ने इस डर को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है। ताज़ा रक्षा रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह इलाका अब कोई 'कमजोर नस' नहीं, बल्कि एक 'अभेद्य किला' (Impenetrable Fortress) बन चुका है।

बांग्लादेश की तो बिसात ही क्या है?
हाल ही में पड़ोसी देशों (खासकर बांग्लादेश और चीन) में जो हलचल हुई, उसके बाद सवाल उठने लगे थे। लेकिन डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि बांग्लादेश की धमकियां तो छोड़िये, अगर चीन और पाकिस्तान (China-Pakistan) दोनों मिल भी जाएं और साथ में हमला करें, तब भी वो भारत के इस हिस्से को तोड़ नहीं सकते।

सेना ने ऐसा क्या जादू किया?
भारतीय सेना ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को 'नेक्स्ट लेवल' पर पहुंचा दिया है। इसे अब सिर्फ सैनिकों के भरोसे नहीं छोड़ा गया है।

  1. टेक्नोलॉजी का पहरा: जमीन से लेकर आसमान तक, रडार, ड्रोन और हाई-टेक सर्विलांस सिस्टम तैनात हैं। दुश्मन की एक हरकत भी अब छिप नहीं सकती।
  2. तीनों सेनाओं का घेरा: यहाँ अब सिर्फ थल सेना नहीं, बल्कि वायु सेना और ज़रूरत पड़ने पर अन्य बलों का जबरदस्त को-ऑर्डिनेशन (तालमेल) है।
  3. क्विक रिस्पांस टीम: अगर रत्ती भर भी गड़बड़ी दिखी, तो सेना कुछ ही मिनटों में मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है।

दुश्मन का 'दुस्वप्न'
चीन हमेशा से इस इलाके (डोकलाम के पास) पर नजर गड़ाए बैठा था, यह सोचकर कि यह भारत की दुखती रग है। लेकिन भारत ने वहां इंफ्रास्ट्रक्चर और सैनिकों की तैनाती इतनी बढ़ा दी है कि अब चीन के लिए वहां झांकना भी जोखिम भरा हो गया है।

रिपोर्ट साफ कहती है कि 60 किलोमीटर लंबा और 20-22 किलोमीटर चौड़ा यह कॉरिडोर अब इतना सुरक्षित है कि इसे भेदना किसी के बस की बात नहीं। यह बदलाव रातों-रात नहीं हुआ, बल्कि पिछले कुछ सालों की कड़ी तपस्या और रणनीति का नतीजा है।