पहली करवा चौथ: कब, कैसे और किन चीज़ों के साथ करें, यहाँ जानें सब कुछ
शादी के बाद ज़िंदगी के कई खूबसूरत पड़ावों में से एक है पहला करवा चौथ. ये सिर्फ़ एक व्रत नहीं, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते की मिठास, प्यार और एक-दूसरे के लिए समर्पण का प्रतीक है. इस दिन पत्नियाँ अपने पति की लंबी उम्र और अच्छी सेहत के लिए बिना कुछ खाए-पिए व्रत रखती हैं. अगर आप भी इस साल पहली बार यह व्रत रखने जा रही हैं, तो मन में थोड़ी घबराहट और ढेर सारे सवाल होना लाज़मी है.
लेकिन चिंता की कोई बात नहीं है. हम आपके पहले करवा चौथ को यादगार बनाने के लिए वो सारी जानकारी लेकर आए हैं, जो आपके हर सवाल का जवाब देगी.
करवा चौथ कब है?
करवा चौथ का व्रत हर साल कार्तिक महीने में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है.
पूजा की थाली में क्या-क्या होना ज़रूरी है?
आपकी पूजा की थाली आपके इस व्रत का सबसे ज़रूरी हिस्सा है. सुनिश्चित करें कि इसमें ये सभी चीज़ें मौजूद हों:
- करवा: मिट्टी का छोटा-सा कलश, जिसमें आप पानी और दूध भरेंगी.
- पूजा की थाली: इसमें सिंदूर, मेहंदी, हल्दी, फूल, मिश्री और सुपारी रखें.
- दीपक और अगरबत्ती: पूजा के लिए.
- भोग के लिए: फल, मिठाई, सूखे मेवे और चावल.
- व्रत कथा की किताब: यह पूजा का सबसे अहम हिस्सा है.
पहली बार व्रत रख रही हैं? ये है पूजा की सबसे आसान विधि
पहली बार में किसी भी चीज़ को लेकर घबराहट हो सकती है, इसलिए हमने आपके लिए पूजा की एक बहुत ही सरल विधि तैयार की है:
- व्रत की शुरुआत: करवा चौथ के दिन सुबह सूरज उगने से पहले उठकर स्नान करें. सास द्वारा दी गई सरगी खाकर अपने व्रत की शुरुआत करें. इसके बाद पूरे दिन आपको कुछ भी खाना या पीना नहीं है.
- शाम की तैयारी: शाम के समय पूजा के लिए तैयार हो जाएं. अपनी पूजा की थाली सजाएं और मिट्टी के करवे में पानी, दूध और थोड़े से चावल डालकर उसे तैयार कर लें.
- माँ पार्वती की पूजा: सबसे पहले पूजा की थाली में दीपक जलाकर माँ पार्वती की आराधना करें. उन्हें हल्दी, सिंदूर और फूल चढ़ाकर अपने सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करें.
- व्रत कथा सुनें: घर की सभी महिलाओं के साथ मिलकर या अकेले ही करवा चौथ की व्रत कथा ज़रूर पढ़ें या सुनें. इसके बिना व्रत अधूरा माना जाता है.
- चाँद का इंतज़ार और अर्घ्य: जब आसमान में चाँद निकल आए, तो एक छलनी से पहले चाँद को देखें और फिर अपने पति को. इसके बाद चाँद को अर्घ्य (जल) चढ़ाएं और उनकी लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करें.
- व्रत खोलें: आख़िर में अपने पति के हाथ से पानी पीकर अपना व्रत खोलें और उनका आशीर्वाद लें.
यह व्रत सिर्फ़ भूखे रहने का नाम नहीं, बल्कि अपने रिश्ते को और भी मज़बूत बनाने का एक मौक़ा है. इसे पूरे दिल और श्रद्धा के साथ मनाएं.