झारखंड में लाल गलियारे की आपसी जंग, उग्रवादियों ने एक-दूसरे पर बरसाईं गोलियां, दो के शव बरामद
News India Live, Digital Desk: झारखंड के बीहड़ों और जंगलों में दशकों से हिंसा का साया रहा है, पर इस बार की घटना ने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौकन्ना कर दिया है। अक्सर हम सुनते हैं कि सुरक्षा बलों और उग्रवादियों के बीच मुठभेड़ हुई, लेकिन यहाँ कहानी थोड़ी अलग है। खबर है कि एक प्रतिबंधित उग्रवादी गुट के भीतर ही फूट पड़ गई और यह फूट इतनी गहरी थी कि बात बंदूकों तक पहुँच गई।
क्या है पूरी घटना?
जानकारी के मुताबिक, झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाके में देर रात उग्रवादी गुट के सदस्यों के बीच किसी बात को लेकर बहस शुरू हुई। देखते ही देखते यह विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। गुट के ही सदस्यों ने एक-दूसरे पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। इस आपसी गैंगवार में दो सदस्यों की मौके पर ही गोली लगने से मौत हो गई।
वर्चस्व या वसूली का विवाद?
जानकारों की मानें तो इन संगठनों के बीच अक्सर 'वर्चस्व' और लेवी (अवैध वसूली) के पैसों के बंटवारे को लेकर खींचतान चलती रहती है। जब संगठनों की कमर टूटने लगती है, तो अंदरूनी कलह और ज्यादा बढ़ जाती है। इसी का नतीजा है कि अब वे एक-दूसरे के खून के प्यासे हो रहे हैं। पुलिस को शक है कि किसी पुरानी रंजिश या गुट में अपनी ताकत दिखाने की होड़ में इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया है।
पुलिस की मुस्तैदी और सर्च ऑपरेशन
जैसे ही जंगल से गोलियां चलने की सूचना मिली, स्थानीय पुलिस और सीआरपीएफ के जवान अलर्ट मोड पर आ गए। खबर मिलते ही सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर दी है। घटनास्थल से पुलिस ने शवों को बरामद कर लिया है और इलाके में तलाशी अभियान (Search Operation) तेज कर दिया गया है ताकि भाग रहे बाकी हमलावरों को पकड़ा जा सके।
बिखरते उग्रवादी संगठनों की तस्वीर
यह घटना इस बात का साफ संकेत है कि झारखंड में सक्रिय इन प्रतिबंधित संगठनों का आधार अब धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। वैचारिक लड़ाई से हटकर ये गुट अब आपसी रंजिश और छोटे-छोटे निजी फायदों के लिए लड़ने लगे हैं। इलाके के ग्रामीणों में इस घटना के बाद डर का माहौल है, हालांकि पुलिस का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
झारखंड पुलिस अब इस मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है कि आखिर ये दोनों सदस्य किस रैंक के थे और इस हिंसक झड़प की असली जड़ क्या थी। फिलहाल, पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील है और चप्पे-चप्पे पर नज़र रखी जा रही है।