लद्दाख को नहीं मिलेगा पूर्ण राज्य का दर्जा केंद्र ने दिया दो टूक जवाब, लेकिन आंदोलन शांत करने के लिए रखा यह नया ऑफर

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News India Live, Digital Desk: केंद्र सरकार ने लद्दाख की पूर्ण राज्य (Full Statehood) की मांग पर अपनी स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। पिछले काफी समय से लेह और कारगिल के संगठनों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच, गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि रणनीतिक कारणों से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देना संभव नहीं है। हालांकि, गतिरोध को खत्म करने के लिए सरकार ने लद्दाख के लोगों के सामने एक 'नया प्रशासनिक फॉर्मूला' पेश किया है।

1. पूर्ण राज्य की मांग क्यों ठुकराई गई?

सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि लद्दाख एक संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र है (चीन और पाकिस्तान के साथ सीमाएं साझा करता है)। सुरक्षा और सामरिक दृष्टिकोण से इस क्षेत्र का सीधा नियंत्रण केंद्र के पास होना आवश्यक है।

केंद्र शासित प्रदेश ही रहेगा: लद्दाख वर्तमान की तरह बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश (UT) बना रहेगा।

संवैधानिक सुरक्षा: 6वीं अनुसूची (6th Schedule) जैसी मांगों पर भी सरकार ने सीधे तौर पर 'हां' नहीं कहा है, लेकिन उसके समकक्ष सुरक्षा देने का वादा किया है।

2. क्या है सरकार का 'नया ऑफर'?

आंदोलनकारियों को शांत करने के लिए केंद्र सरकार ने स्वायत्तता और सशक्तिकरण का एक मध्य मार्ग सुझाया है:

पावरफुल हिल काउंसिल्स: लेह और कारगिल की 'लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद' (LAHDC) को अब पहले से कहीं अधिक वित्तीय और विधायी शक्तियां दी जाएंगी।

नौकरी और जमीन की सुरक्षा: स्थानीय लोगों के लिए सरकारी नौकरियों में 80-90% आरक्षण और भूमि अधिकारों के संरक्षण के लिए विशेष कानून (अनुच्छेद 371 जैसी सुरक्षा) का प्रस्ताव दिया गया है।

लोकसभा सीट: लद्दाख के प्रतिनिधित्व को और मजबूत करने के लिए अतिरिक्त प्रशासनिक पदों के सृजन की भी बात कही गई है।

3. सोनम वांगचुक और लद्दाख के संगठनों का रुख

सरकार के इस रुख के बाद लद्दाख में मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है। 'लेह एपेक्स बॉडी' (LAB) और 'कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस' (KDA) ने अभी इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर नहीं लगाई है।

आंदोलन की चेतावनी: पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक और अन्य नेताओं का कहना है कि वे केवल पूर्ण राज्य और 6वीं अनुसूची से कम पर समझौता नहीं करेंगे।

बजट और विकास: हालांकि, सरकार ने तर्क दिया है कि UT बनने के बाद लद्दाख का बजट कई गुना बढ़ गया है और विकास कार्यों में तेजी आई है।

4. आगामी चुनाव और लद्दाख का भविष्य

2026 के राजनीतिक परिदृश्य में लद्दाख का मुद्दा केंद्र सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। सरकार चाहती है कि क्षेत्रीय अस्थिरता का लाभ पड़ोसी देश न उठा सकें, इसलिए वे जल्द से जल्द स्थानीय नेताओं के साथ एक 'आम सहमति' (Consensus) बनाना चाहते हैं।