Kota School Van Accident : सुबह हंसते-खेलते स्कूल जा रहे थे बच्चे, एक तेज रफ्तार कार ने सब कुछ खत्म कर दिया
News India Live, Digital Desk : राजस्थान की एजुकेशन सिटी कोटा में शुक्रवार की सुबह एक 'ब्लैक फ्राइडे' बनकर आई। सुबह-सुबह अपने घरों से हंसते-खेलते स्कूल के लिए निकले मासूम बच्चे एक भयानक और दर्दनाक सड़क हादसे का शिकार हो गए, जिसमें 2 छात्रों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक दर्जन से ज्यादा बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस भीषण टक्कर के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। सड़क पर बच्चों के बिखरे हुए स्कूल बैग, टिफिन और खून के धब्बे... यह मंजर इतना भयावह था कि देखने वालों की भी रूह कांप गई।
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
यह दिल दहला देने वाली घटना कोटा के सिमलिया थाना क्षेत्र के पास हुई।
- बच्चों से खचाखच भरी थी वैन: एक निजी स्कूल की वैन, जो अपनी क्षमता से ज्यादा बच्चों से भरी हुई थी, पास के गांवों से बच्चों को लेकर स्कूल की ओर जा रही थी।
- तेज रफ्तार बनी काल: बताया जा रहा है कि उसी समय, सामने से आ रही एक तेज रफ्तार SUV (स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल) ने अपना नियंत्रण खो दिया और सीधे स्कूल वैन से आमने-सामने टकरा गई।
- उड़ गए वैन के परखच्चे: टक्कर इतनी भीषण और जोरदार थी कि स्कूल वैन का अगला हिस्सा बुरी तरह से पिचक गया और उसके परखच्चे उड़ गए। वैन में बैठे बच्चे एक-दूसरे के ऊपर जा गिरे और बुरी तरह जख्मी हो गए।
चारों तरफ मची चीख-पुकार
हादसे के तुरंत बाद मौके पर कोहराम मच गया। घायल बच्चों की चीख-पुकार से पूरा इलाका गूंज उठा। आसपास के लोग और राहगीर तुरंत मदद के लिए दौड़े। उन्होंने वैन के टूटे-फूटे हिस्सों से बच्चों को बाहर निकाला और पुलिस को सूचना दी।
अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल
सूचना मिलते ही पुलिस और एम्बुलेंस मौके पर पहुंचीं और सभी घायल बच्चों को कोटा के एमबीएस अस्पताल (MBS Hospital) में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। कई बच्चों की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है।
दो बच्चों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था। इस खबर के मिलते ही बच्चों के परिवार वालों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अस्पताल में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे शहर में इस घटना के बाद से मातम का माहौल है।
कौन है जिम्मेदार?
पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हादसे के कारणों की जांच कर रही है। शुरुआती जांच में SUV ड्राइवर की तेज रफ्तार को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है। साथ ही, स्कूल वैन में क्षमता से ज्यादा बच्चे बैठाने को लेकर भी स्कूल प्रबंधन और वैन ड्राइवर पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
यह दर्दनाक हादसा एक बार फिर हमारे सिस्टम पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है - आखिर कब तक तेज रफ्तार का कहर सड़कों पर यूं ही मासूम जिंदगियां छीनता रहेगा? और कब तक स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को इस तरह नजरअंदाज किया जाता रहेगा?