Supreme Court : जांच की आंच में अनंत अंबानी का ड्रीम प्रोजेक्ट, जानिए SIT के रडार पर क्यों आया वनतारा

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News India Live, Digital Desk: Supreme Court : अनंत अंबानी का महत्वाकांक्षी वन्यजीव बचाव केंद्र 'वनतारा' एक बड़े विवाद में घिर गया है। जानवरों की सेवा और बचाव के लिए बनाए गए इस केंद्र पर अब गंभीर आरोप लग रहे हैं, जिनकी गूंज सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। सोमवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपों की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (SIT) का गठन किया है। यह फैसला गुजरात के जामनगर में स्थित इस विशाल केंद्र के कामकाज पर कई सवाल खड़े करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों उठाया यह कदम?

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला दो जनहित याचिकाओं (PILs) पर सुनवाई के बाद लिया।  इन याचिकाओं में वनतारा पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे, जैसे:

हालांकि कोर्ट ने यह भी माना कि ये याचिकाएं काफी हद तक मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं, लेकिन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए एक स्वतंत्र तथ्यात्मक जांच कराना जरूरी समझा गया।

कौन करेगा इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच?

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय SIT बनाई है। इस टीम की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज, जस्टिस जे. चेलमेश्वर करेंगे। उनके साथ उत्तराखंड और तेलंगाना हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस राघवेंद्र चौहान, मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर हेमंत नागराले और IRS अधिकारी अनीश गुप्ता भी इस टीम का हिस्सा होंगे। यह टीम सभी आरोपों की गहराई से जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी।

क्या है पूरा विवाद?

यह विवाद तब और गरमा गया जब हाल ही में महाराष्ट्र के कोल्हापुर से 'महादेवी' नाम की एक सम्मानित हथिनी को वनतारा शिफ्ट किया गया, जिसका स्थानीय लोगों ने भारी विरोध किया था।  इसके अलावा, कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव संगठनों ने भी वनतारा में जानवरों को लाए जाने के तरीकों पर चिंता जताई है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि यह केंद्र संरक्षण की आड़ में अरबपति का एक निजी चिड़ियाघर जैसा है।

हालांकि, वनतारा ने हमेशा इन सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उनके सभी ऑपरेशन पूरी तरह से कानूनी और पारदर्शी हैं और वे जानवरों के बचाव और पुनर्वास के लिए उच्चतम मानकों का पालन करते हैं।

अब SIT की जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है। यह मामला न केवल वनतारा के भविष्य के लिए अहम है, बल्कि यह भारत में निजी वन्यजीव संरक्षण केंद्रों के कामकाज और उनकी जवाबदेही को लेकर भी बड़े सवाल खड़े करता है।