Indian Festival : कृष्ण से पहले राधे का नाम क्यों लेते हैं? जानिए इसके पीछे छिपी खूबसूरत कहानी

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News India Live, Digital Desk: Indian Festival :  हम सब बचपन से सुनते और कहते आए हैं - 'राधे-कृष्ण'। कभी 'कृष्ण-राधे' बहुत कम ही सुनने को मिलता है। कभी सोचा है आपने कि ऐसा क्यों है? जिनकी हम पूजा करते हैं, उन भगवान कृष्ण से पहले उनकी प्रिय राधा का नाम क्यों लिया जाता है? इसका जवाब एक छोटी सी, लेकिन बहुत ही प्यारी कहानी में छिपा हुआ है, जिसका सीधा संबंध राधा रानी के प्रेम और निस्वार्थ भक्ति से है।

खासकर जब राधा अष्टमी का त्योहार नजदीक हो, तो यह कथा और भी खास हो जाती है। तो चलिए, जानते हैं उस रहस्य के बारे में जो 'राधे' नाम को इतना शक्तिशाली बनाता है।

जब भगवान कृष्ण हो गए बीमार

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान कृष्ण बहुत बीमार पड़ गए। उनकी हालत इतनी गंभीर हो गई कि कोई भी दवा या जड़ी-बूटी उन पर असर नहीं कर रही थी। सभी देवी-देवता और गोपियां चिंतित हो उठीं। जब कोई उपाय काम नहीं आया, तो भगवान कृष्ण ने खुद ही इसका इलाज बताया।

उन्होंने नारद मुनि से कहा कि अगर उनका कोई सच्चा भक्त अपने पैरों की धूल उन्हें दे दे, तो वे ठीक हो सकते हैं।

यह सुनकर हर कोई सोच में पड़ गया। नारद मुनि सबसे पहले कृष्ण की पत्नियों के पास गए, लेकिन सबने यह सोचकर मना कर दिया कि वे अपने पति को अपने पैरों की धूल देकर पाप की भागीदार कैसे बन सकती हैं। यह तो घोर अनर्थ होता। कोई भी यह पाप करने को तैयार नहीं हुआ।

जब राधा ने दिखाया निस्वार्थ प्रेम

हारकर नारद मुनि वृंदावन में राधा रानी और गोपियों के पास पहुंचे और उन्हें पूरी बात बताई। जैसे ही राधा जी ने यह सुना, उन्होंने एक पल भी नहीं सोचा और तुरंत अपने पैरों की धूल नारद मुनि को दे दी। बाकी गोपियों ने भी ऐसा ही किया।

नारद मुनि ने जब राधा जी से पूछा कि क्या उन्हें नर्क में जाने का डर नहीं है, तो राधा रानी ने जो जवाब दिया, वही इस पूरे रहस्य का सार है।

राधा जी ने कहा, "मेरे कृष्ण की सेहत के लिए अगर मुझे नर्क भी जाना पड़े, तो मैं खुशी-खुशी चली जाऊंगी। मेरे लिए मेरे प्रभु के स्वास्थ्य से बढ़कर कुछ भी नहीं है।"

यह निस्वार्थ प्रेम देखकर भगवान कृष्ण भावुक हो गए। कहते हैं, उस चरण धूलि को लगाते ही वह पूरी तरह से स्वस्थ हो गए। उसी दिन उन्होंने यह वरदान दिया कि जो कोई भी उनसे पहले राधा का नाम लेगा, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी और वह हमेशा उनके प्रिय भक्तों में गिना जाएगा।

यही वजह है कि आज भी दुनिया 'राधे-कृष्ण' बोलती है, क्योंकि राधा का नाम लेना ही कृष्ण तक पहुंचने का सबसे सरल मार्ग है। उनका नाम जपने से ही जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।