Khejri Andolan Bikaner: अनशन का तीसरा दिन 70 से अधिक आंदोलनकारियों की हालत बिगड़ी, वसुंधरा राजे का समर्थन

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News India Live, Digital Desk: बीकानेर कलेक्ट्रेट के सामने पिछले कई दिनों से जारी 'खेजड़ी बचाओ महापड़ाव' अब भारी तनाव के बीच चल रहा है। 3 फरवरी से शुरू हुए सामूहिक आमरण अनशन में शामिल लोगों की सेहत अब तेजी से गिर रही है। ताज़ा जानकारी के अनुसार, कड़ाके की ठंड और अन्न-जल त्यागने के कारण अब तक 70 से अधिक प्रदर्शनकारियों की तबीयत बिगड़ चुकी है, जिनमें से कई को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

आंदोलन के मुख्य बिंदु और ताज़ा अपडेट्स

सामूहिक अनशन: वर्तमान में 480 से अधिक पर्यावरण प्रेमी (जिनमें 29 संत और 60 महिलाएं शामिल हैं) आमरण अनशन पर डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारी 'ट्री प्रोटेक्शन एक्ट' को तत्काल लागू करने और खेजड़ी की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग कर रहे हैं।

नेताओं का जमावड़ा और समर्थन:

वसुंधरा राजे: पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सोशल मीडिया पर खेजड़ी की पूजा करते हुए फोटो साझा कर आंदोलन को खुला समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि खेजड़ी आस्था का प्रतीक है और इसके संरक्षण के लिए राजनीति से ऊपर उठना होगा।

गोविंद राम मेघवाल: पूर्व मंत्री ने सरकार पर दबाव बनाते हुए मांग की है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा विधानसभा में अगले दो दिनों के भीतर सख्त कानून बनाने की घोषणा करें।

हरिश चौधरी और अशोक गहलोत: कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने भी इस आंदोलन को जायज ठहराते हुए पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने की बात कही है।

प्रशासन की स्थिति: बीकानेर कलेक्टर और एसपी ने आंदोलनकारियों से मुलाकात कर आश्वासन दिया है कि फिलहाल किसी भी पेड़ को नहीं काटा जाएगा, लेकिन प्रदर्शनकारी लिखित आदेश और कानून बनने तक हटने को तैयार नहीं हैं। सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल और STF तैनात की गई है।

क्यों हो रहा है यह विरोध?

पश्चिमी राजस्थान में बड़े पैमाने पर लग रहे सोलर पावर प्रोजेक्ट्स के लिए भूमि समतल करने के दौरान हज़ारों की संख्या में खेजड़ी के पेड़ों को काटा जा रहा है। बिश्नोई समाज और स्थानीय लोगों के लिए यह पेड़ पूजनीय है, और वे इसे 1730 के ऐतिहासिक खेजड़ली बलिदान (अमृता देवी बिश्नोई) से जोड़कर देख रहे हैं।