Kerala Name Change : अब केरल नहीं, केरलम कहिए मोदी सरकार के फैसले पर क्यों भड़के शशि थरूर
News India Live, Digital Desk: दक्षिण भारत के खूबसूरत राज्य केरल की पहचान अब आधिकारिक तौर पर बदलने जा रही है। केंद्र की मोदी सरकार ने राज्य का नाम बदलकर 'केरलम' (Keralam) करने के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है। हालांकि, इस भाषाई और सांस्कृतिक बदलाव पर अब सियासत गरमा गई है। कांग्रेस के दिग्गज नेता और तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने इस फैसले के "समय" और "तरीके" पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है।
क्यों बदला गया नाम? क्या है इसके पीछे का तर्क
केरल विधानसभा ने काफी समय पहले सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें केंद्र से संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत राज्य का नाम 'केरल' से बदलकर 'केरलम' करने का आग्रह किया गया था।
मलयालम पहचान: स्थानीय भाषा मलयालम में इस राज्य को हमेशा से 'केरलम' ही कहा जाता है।
सांस्कृतिक गौरव: राज्य सरकार का तर्क है कि आधिकारिक दस्तावेजों और संविधान की आठवीं अनुसूची में भी 'केरलम' शब्द का ही इस्तेमाल होना चाहिए ताकि राज्य की भाषाई विरासत का सम्मान हो सके।
केंद्र की मुहर: गृह मंत्रालय ने अब इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है, जिसके बाद नाम परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
शशि थरूर की आपत्ति: "यह सिर्फ ध्यान भटकाने की राजनीति है"
नाम बदलने के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उनके विरोध के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
प्राथमिकता पर सवाल: थरूर का कहना है कि जब देश और राज्य के सामने बेरोजगारी और आर्थिक चुनौतियां हैं, तब नाम बदलने जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देना समझ से परे है।
अनुवाद की समस्या: उन्होंने तर्क दिया कि अंग्रेजी में 'केरल' कहना आसान और वैश्विक स्तर पर स्वीकृत है, जबकि 'केरलम' मुख्य रूप से मलयालम बोलने वालों के लिए है।
सिर्फ हेडलाइन हंटिंग: थरूर ने इसे मोदी सरकार की "नाम बदलने की राजनीति" करार देते हुए कहा कि यह सिर्फ असली मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश है।
क्या बदलेगा आम जनता के लिए?
सरकारी दस्तावेज: अब भविष्य में केंद्र और राज्य सरकार के सभी गजट, पहचान पत्र और सरकारी पत्राचार में 'केरल' की जगह 'केरलम' लिखा जाएगा।
संवैधानिक संशोधन: संसद में इस संबंध में एक विधेयक लाना होगा ताकि संविधान की पहली अनुसूची में बदलाव किया जा सके।
विशेष नोट: यह पहली बार नहीं है जब किसी राज्य या शहर का नाम बदला गया हो (जैसे उड़ीसा से ओडिशा या बॉम्बे से मुंबई), लेकिन 'केरलम' का मुद्दा अपनी भाषाई जड़ों की वजह से काफी भावुक माना जा रहा है।