Kartik Amavasya 2025 : नोट कर लें सही डेट और शुभ मुहूर्त ,इस दिन मिलेगा लक्ष्मी पूजा, स्नान-दान का महापर्व
News India Live, Digital Desk: Kartik Amavasya 2025 : भारत के प्रमुख और पवित्र त्योहारों में से एक, दीपावली का महा पर्व, कार्तिक अमावस्या के दिन ही मनाया जाता है. यह दिन न केवल माता लक्ष्मी की पूजा के लिए खास है, बल्कि स्नान-दान और पितरों के तर्पण के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. साल 2025 में, कार्तिक अमावस्या की तिथि और शुभ मुहूर्त को लेकर कुछ खास बातें हैं, जिन्हें जानना आपके लिए जरूरी है.
कार्तिक अमावस्या 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त
- तिथि: साल 2025 में कार्तिक अमावस्या शनिवार, 2 नवंबर को पड़ रही है.
- अमावस्या प्रारंभ: 1 नवंबर, 2025 को रात 8 बजकर 3 मिनट से अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी.
- अमावस्या समाप्त: 2 नवंबर, 2025 को शाम 4 बजकर 40 मिनट पर अमावस्या तिथि समाप्त होगी.
पूरा दिन 2 नवंबर को अमावस्या का पर्व मनाया जाएगा, क्योंकि सूर्योदय से लेकर शाम तक यह तिथि मान्य रहेगी. इसी दिन मुख्य रूप से दिवाली और लक्ष्मी पूजन किया जाएगा.
कार्तिक अमावस्या का महत्व:
यह दिन कई कारणों से बेहद खास माना जाता है:
- महा दिवाली का पर्व: कार्तिक अमावस्या की रात को दीपावली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन घरों में दीये जलाकर अंधेरा दूर किया जाता है और माता लक्ष्मी व भगवान गणेश की विशेष पूजा अर्चना की जाती है, ताकि घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य बना रहे.
- स्नान-दान का पुण्य: इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है. माना जाता है कि ऐसा करने से पापों से मुक्ति मिलती है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है.
- पितरों का तर्पण: कार्तिक अमावस्या का दिन पितरों को याद करने और उनके निमित्त तर्पण, पिंडदान या श्राद्ध कर्म करने के लिए भी उपयुक्त होता है. ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है.
- कालसर्प दोष निवारण: ज्योतिषीय दृष्टि से यह दिन कालसर्प दोष और अन्य ग्रहों के बुरे प्रभावों को कम करने के लिए भी खास माना जाता है.
कुछ विशेष उपाय (Upay):
- कार्तिक अमावस्या के दिन शाम को अपने घर के बाहर और आसपास दीये जरूर जलाएं. एक दीपक घर के मुख्य द्वार पर जलाएं और एक पीपल के पेड़ के नीचे रखना भी शुभ माना जाता है.
- गंगा या किसी अन्य पवित्र नदी में स्नान करने के बाद गरीब और जरूरतमंद लोगों को अपनी क्षमता अनुसार अनाज, वस्त्र या धन का दान करें.
- घर में माता लक्ष्मी और गणेश जी की विधिवत पूजा-अर्चना करें और उन्हें खीर-बताशे जैसे भोग लगाएं.
- पितरों की शांति के लिए किसी पवित्र स्थल पर या घर पर ही उनके नाम से दीपक जलाएं और प्रार्थना करें.
यह पवित्र तिथि जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने के लिए एक विशेष अवसर प्रदान करती है.