कर्नाटक की सियासत क्या सच में शांत हैं शिवकुमार या चल रही है कोई नई तैयारी?

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News India Live, Digital Desk: राजनीति में अक्सर जो कहा जाता है, उसके मायने कुछ और ही होते हैं। इन दिनों कर्नाटक की राजनीति में कुछ ऐसा ही माहौल बना हुआ है। पिछले कुछ दिनों से मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा जोरों पर थी कि क्या कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन (Leadership Change) होने वाला है? क्या डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार अब सीएम की कुर्सी पर दावा ठोंकने वाले हैं? इन तमाम सवालों पर अब खुद 'डीके' ने अपनी चुप्पी तोड़ दी है।

"मुझे कोई हड़बड़ी नहीं है"
सियासी ड्रामे के बीच डीके शिवकुमार ने जो बयान दिया है, उसने कई लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। उन्होंने बहुत ही सधे हुए अंदाज में साफ कर दिया कि वो किसी भी चीज़ के लिए "हड़बड़ी" (Rush) में नहीं हैं। उनका कहना है कि पार्टी ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी है, वे उसे निभा रहे हैं और फिलहाल वो किसी रेस में नहीं भाग रहे।

यह बयान तब आया है जब कर्नाटक कांग्रेस के भीतर की गुटबाजी की खबरें अक्सर हेडलाइंस बन रही हैं। सीएम सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच "पावर शेयरिंग" के फॉर्मूले को लेकर आए दिन कयास लगाए जाते हैं।

दिल्ली दौरों से बढ़ा था सस्पेंस
दरअसल, हाल ही में नेताओं के दिल्ली आने-जाने और हाईकमान के साथ बैठकों के दौर ने अफवाहों का बाजार गर्म कर दिया था। समर्थकों को लग रहा था कि शायद अब 'डीके' का वक्त आ गया है। लेकिन शिवकुमार का यह बयान—कि उन्हें कोई जल्दी नहीं है—एक तरफ तो पार्टी नेतृत्व (High Command) को यह संदेश है कि वो बागी नहीं हैं, और दूसरी तरफ विरोधियों को यह इशारा कि वे अभी 'गेम' से बाहर भी नहीं हुए हैं। राजनीति में धैर्य सबसे बड़ा हथियार होता है, और शायद शिवकुमार इसी का इस्तेमाल कर रहे हैं।

जनता क्या सोच रही है?
आम जनता के लिए यह समझ पाना मुश्किल हो रहा है कि सरकार में सब कुछ ठीक चल रहा है या फिर अंदरखाने कोई खिचड़ी पक रही है। शिवकुमार के इस बयान ने फिलहाल तो माहौल को थोड़ा ठंडा कर दिया है, लेकिन राजनीति में 24 घंटे भी बहुत लंबा वक्त होता है।

अभी के लिए इतना ही समझ लीजिये कि 'पिक्चर अभी बाकी है'। क्या शिवकुमार सच में खुश हैं, या यह किसी बड़ी रणनीति का हिस्सा है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।