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April 25 2026 04:45 am

Jyeshtha Month 2026 : शुरू होने वाला है साल का सबसे गर्म महीना, ज्येष्ठ में इन नियमों का पालन दिलाएगा सुख-समृद्धि

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News India Live, Digital Desk: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, वैशाख मास के समाप्त होते ही 'ज्येश्च मास' (Jyeshtha Month) की शुरुआत हो जाती है। इसे साल का तीसरा और सबसे गर्म महीना माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से ज्येष्ठ मास का विशेष महत्व है क्योंकि इसी महीने में गंगा दशहरा, निर्जला एकादशी और वट सावित्री जैसे बड़े व्रत-त्योहार आते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस महीने में किए गए कुछ विशेष कार्य और दान-पुण्य न केवल पुण्य फल देते हैं, बल्कि घर की आर्थिक प्रगति के मार्ग भी खोलते हैं।

ज्येष्ठ मास में 'बड़े' सदस्यों का सम्मान और तरक्की का संबंध

ज्येष्ठ का अर्थ ही होता है 'बड़ा'। शास्त्र कहते हैं कि इस महीने में परिवार के सबसे बड़े सदस्य (ज्येष्ठ) की सेवा और उनका सम्मान करने से सूर्य और मंगल जैसे ग्रह अनुकूल होते हैं। माना जाता है कि यदि घर के बड़े बुजुर्ग खुश रहें, तो परिवार में अकाल मृत्यु का भय टल जाता है और सुख-शांति बनी रहती है। इस महीने में बड़ों के चरण स्पर्श करना और उनकी जरूरतों का ध्यान रखना विशेष फलदायी माना गया है।

जल दान का महात्म्य: प्यासे को पानी पिलाने का फल

चूंकि ज्येष्ठ मास में सूर्य देव अपने रौद्र रूप में होते हैं और गर्मी चरम पर होती है, इसलिए इस महीने में जल दान को सबसे बड़ा धर्म माना गया है।

पशु-पक्षियों के लिए: छतों पर परिंडे रखना और प्यासे पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करना शुभ होता है।

राहगीरों के लिए: प्याऊ लगवाना या राहगीरों को शीतल जल पिलाने से कुंडली के दोष शांत होते हैं।

मिट्टी का घड़ा: इस महीने में ब्राह्मण या जरूरतमंद को पानी से भरा मिट्टी का घड़ा (कलश) दान करना 'अश्वमेध यज्ञ' के समान फल देता है।

ज्येष्ठ मास के कड़े नियम: क्या करें और क्या न करें?

शास्त्रों में इस महीने के लिए कुछ विशेष नियम बताए गए हैं ताकि व्यक्ति स्वास्थ्य और आध्यात्मिक लाभ पा सके:

दोपहर में सोना मना: मान्यता है कि ज्येष्ठ के महीने में दोपहर के समय सोने से बीमारियां घेरती हैं और आयु कम होती है।

एक समय भोजन: इस महीने में केवल एक समय भोजन करने वाला व्यक्ति निरोगी रहता है।

हनुमान जी की पूजा: ज्येष्ठ मास के मंगलवार (बड़े मंगल) को हनुमान जी की पूजा करने से हर तरह के संकट दूर होते हैं।

बैंगन और राई का त्याग: आयुर्वेद के अनुसार, इस महीने में बैंगन और राई जैसी गर्म तासीर वाली चीजों के सेवन से परहेज करना चाहिए।

सूर्य देव की उपासना है अनिवार्य

इस महीने के स्वामी स्वयं सूर्य देव हैं। इसलिए प्रतिदिन सूर्योदय के समय अर्घ्य देना और 'आदित्य हृदय स्तोत्र' का पाठ करना करियर में आ रही बाधाओं को दूर करता है। सूर्य को जल देते समय उसमें लाल चंदन या लाल फूल डालना और भी शुभ माना जाता है।