Justice Gavai's warning : क्या भारत में न्यायपालिका असहाय, सरकारी समर्थन पर उठे बड़े सवाल

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News India Live, Digital Desk: Justice Gavai's warning : सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बी.आर. गवई ने हाल ही में देश में न्यायालयों की बढ़ती असहायता और सरकारी उदासीनता पर अपनी चिंता व्यक्त की है। न्यायमूर्ति गवई ने केंद्र सरकार से यह सीधा सवाल किया कि 'हम शक्तिहीन क्यों महसूस करते हैं?' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब न्यायपालिका, विशेषकर अधीनस्थ न्यायालयों को गंभीर बुनियादी ढांचे और मानव संसाधन की कमी का सामना करना पड़ रहा है। उनकी टिप्पणी न्याय के त्वरित और प्रभावी वितरण में सरकारी सहायता की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

न्यायालय ने कहा कि जिला न्यायालय के न्यायाधीश और अधीनस्थ अदालतों के पीठासीन अधिकारी अक्सर यह महसूस करते हैं कि वे एक ऐसी स्थिति में हैं जहाँ उनके हाथ बंधे हुए हैं। पर्याप्त समर्थन की कमी के कारण वे प्रभावी ढंग से कार्य नहीं कर पाते हैं, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में बाधा आती है और मामलों के निपटारे में देरी होती है। इस संदर्भ में न्यायमूर्ति गवई ने एक उदाहरण दिया। एक युवा न्यायाधीश की कहानी सुनाते हुए उन्होंने बताया कि उस न्यायाधीश ने तबादला किए जाने का अनुरोध किया था क्योंकि उसे अपने निजी सहायक को वेतन देने के लिए अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़ रहे थे। न्यायमूर्ति गवई ने कहा, "हमने उस जज का तबादला किया। लेकिन सरकार को जवाब देना होगा: हम शक्तिहीन क्यों महसूस करते हैं?"

इस घटना ने न्यायपालिका के सामने आने वाली वास्तविक चुनौतियों पर प्रकाश डाला है, जहां न्यायाधीशों को न केवल कानूनी मामलों से निपटना पड़ता है, बल्कि उन्हें कर्मचारियों के वेतन जैसे बुनियादी प्रशासनिक मुद्दों से भी जूझना पड़ता है, जो राज्य या केंद्र सरकारों की जिम्मेदारी होती है। न्यायमूर्ति गवई ने जोर दिया कि केंद्र और राज्य सरकारों दोनों को यह सुनिश्चित करने के लिए सहयोग करना होगा कि न्यायाधीशों और न्यायिक कर्मचारियों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध हों। यह संसाधनों की कमी न केवल न्याय के वितरण में बाधा डालती है, बल्कि न्यायिक अधिकारियों के मनोबल को भी प्रभावित करती है। न्यायपालिका के कुशल कामकाज के लिए सरकार की सक्रिय भूमिका महत्वपूर्ण है, ताकि न्याय में देरी न हो और हर नागरिक को समय पर न्याय मिल सके। यह सुनिश्चित करना एक स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी है।

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