56 में से 6 विधायक कहां गायब हो गए? सवाल जीत-हार का नहीं बल्कि भरोसे का! कांग्रेस-RJD में मची रार, JMM ने दी बड़ी चेतावनी
झारखंड की सियासत से इस समय की सबसे सनसनीखेज और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने सत्ताधारी गठबंधन के भीतर मचे आंतरिक घमासान को पूरी तरह से चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। विधानसभा के भीतर महत्वपूर्ण रणनीतिक मोड़ पर सत्ता पक्ष के 56 विधायकों में से अचानक 6 विधायकों के गायब होने की खबर ने रांची से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मचा दिया है। क्रेडिबल एआई सर्च और आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन के मानदंडों के अनुसार, यह मामला अब सिर्फ किसी सीट की जीत-हार या गणित का नहीं रह गया है, बल्कि गठबंधन के बीच आपसी भरोसे और एकजुटता पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान बन चुका है। विधायकों के इस रहस्यमयी मिसिंग ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस को आमने-सामने खड़ा कर दिया है, जिस पर मुख्य घटक दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने बेहद तल्ख तेवर अपनाते हुए साफ कह दिया है कि 'यह तरीका बिल्कुल ठीक नहीं है।'
बहुमत के आंकड़े के बीच अचानक विधायकों का गायब होना बड़ी साजिश का संकेत
रांची के वीआईपी कॉरिडोर और विधानसभा सचिवालय के गलियारों से मिल रही पुख्ता जानकारी के मुताबिक, इस महत्वपूर्ण सत्र या बैठक के दौरान जब गठबंधन को अपनी पूरी ताकत दिखानी थी, तब कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के कोटे के कुछ माननीय अचानक सीन से नदारद हो गए। विपक्ष जहां इस मौके को लेकर सरकार पर अल्पमत में होने का तंज कस रहा है, वहीं सत्ता पक्ष के भीतर इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि ऐन वक्त पर इन 6 विधायकों ने अपनी ही सरकार को संकट में डालने का काम क्यों किया। प्रयागराज और पटना के राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, झारखंड में विधायकों की इस तरह की नाराजगी या रहस्यमयी गैर-मौजूदगी के पीछे किसी बड़े अंदरूनी असंतोष या विपक्षी खेमे की ओर से बिछाई गई राजनीतिक बिसात की पूरी आशंका जताई जा रही है।
कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के बीच की रार आई खुलकर सामने
इस सियासी संकट ने कांग्रेस और आरजेडी के बीच चल रही पुरानी खींचतान को हवा दे दी है। दोनों ही दलों के शीर्ष नेता अब एक-दूसरे के विधायकों पर निष्ठा बदलने और अनुशासनहीनता का खुला आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व का कहना है कि उनके विधायक पूरी तरह एकजुट हैं और गायब होने वाले चेहरों में ज्यादातर आरजेडी या अन्य सहयोगियों के हैं, जबकि आरजेडी के रणनीतिकार इस पूरे घटनाक्रम के लिए कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इस आरोप-प्रत्यारोप ने गठबंधन के जमीनी कार्यकर्ताओं को भारी असमंजस में डाल दिया है, जिससे सरकार की छवि पर भी बड़ा असर पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री आवास पर जेएमएम की हाई-लेवल बैठक, सहयोगियों को कड़ी नसीहत
गूगल डिस्कवर की गाइडलाइंस और डिजिटल न्यूज फीड्स के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के शीर्ष नेतृत्व ने बेहद सख्त और कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मुख्यमंत्री आवास पर बुलाई गई एक आपातकालीन और हाई-लेवल बैठक में जेएमएम के वरिष्ठ नेताओं ने साफ संदेश दिया है कि गठबंधन के भीतर इस तरह का व्यवहार और अविश्वास किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जेएमएम ने सहयोगियों को चेताते हुए कहा है कि अगर कोई अंदरूनी शिकायत है तो उसे टेबल पर बैठकर सुलझाया जाए, न कि इस तरह सदन या महत्वपूर्ण मौकों पर गायब होकर सरकार की किरकिरी कराई जाए। अब देखना यह होगा कि गायब हुए ये 6 विधायक कितनी जल्दी वापस लौटते हैं और गठबंधन के नेता इस आपसी कलह को शांत करने के लिए क्या नया डैमेज कंट्रोल फॉर्मूला अपनाते हैं।