दो बार के सांसद और राष्ट्रीय महामंत्री को मिली बड़ी जिम्मेदारी, जानिए उनका पूरा राजनीतिक सफर
भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक ढांचे को धार देते हुए देश के कई राज्यों में नए प्रभारियों और सह-प्रभारियों की घोषणा कर दी है, जिसमें राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले झारखंड राज्य की कमान अब अनुभवी आदिवासी नेता और सांसद गजेंद्र सिंह पटेल के हाथों में सौंपी गई है। मध्य प्रदेश के खरगोन से लगातार दो बार लोकसभा सांसद रह चुके और पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे गजेंद्र सिंह पटेल को झारखंड भाजपा का नया प्रदेश प्रभारी बनाया गया है। वह डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी का स्थान लेंगे। इस नियुक्ति के बाद झारखंड के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं कौन हैं गजेंद्र सिंह पटेल और क्या है उनका पूरा राजनीतिक सफर।
कौन हैं गजेंद्र सिंह पटेल? जमीनी स्तर से राष्ट्रीय राजनीति तक का सफर
मध्य प्रदेश के निमाड़ अंचल और विशेष तौर पर खरगोन संसदीय क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले गजेंद्र सिंह पटेल भारतीय जनता पार्टी के उन चुनिंदा नेताओं में शुमार हैं जिन्होंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत किसी बड़े पद से नहीं, बल्कि बिल्कुल तृणमूल स्तर (ग्राउंड लेवल) से की है। छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शाखाओं और वैचारिक पृष्ठभूमि से जुड़ने के बाद उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के बैनर तले युवा नेतृत्व के रूप में कार्य करना शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM), वनवासी कल्याण परिषद और पार्टी के अनुसूचित जनजाति (ST) मोर्चा में विभिन्न संगठनात्मक दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया। उनका लंबा सांगठनिक अनुभव और आदिवासी समाजों के बीच गहरी पकड़ उन्हें पार्टी के भीतर एक भरोसेमंद रणनीतिकार के रूप में स्थापित करती है।
छात्र राजनीति से लेकर संसद तक का शानदार चुनावी और सांगठनिक ट्रैक रिकॉर्ड
गजेंद्र सिंह पटेल के राजनीतिक करियर का ग्राफ हमेशा से ऊपर की ओर रहा है। उन्होंने 1990 के दशक से ही वैचारिक और सामाजिक संगठनों के माध्यम से जनता के बीच अपनी पैठ बनानी शुरू कर दी थी। सांगठनिक कौशल और जनता के बीच उनकी सक्रियता को देखते हुए पार्टी ने उन्हें साल 2019 में मध्य प्रदेश की खरगोन लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारा, जहाँ उन्होंने शानदार जीत दर्ज कर पहली बार संसद में कदम रखा। इसके बाद उनकी कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता से प्रभावित होकर पार्टी ने उन्हें 2024 के आम चुनाव में दोबारा टिकट दिया और उन्होंने भारी मतों से जीत हासिल कर लगातार दूसरी बार संसद में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उनकी इसी सांगठनिक दक्षता को देखते हुए भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महामंत्री नियुक्त किया था।
झारखंड में क्यों अहम मानी जा रही है गजेंद्र सिंह पटेल की यह नई नियुक्ति?
वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में झारखंड राज्य भारतीय जनता पार्टी के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण डेस्टिनेशन है। आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी समीकरणों को साधने के लिए पार्टी को एक ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता थी जो आदिवासियों के बीच मजबूत पकड़ रखता हो और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में ऊर्जा का संचार कर सके। गजेंद्र सिंह पटेल के पास एक आदिवासी नेता होने के साथ-साथ कुशल संगठनकर्ता का लंबा अनुभव है, जो झारखंड की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों में पार्टी के लिए बेहद मुफीद साबित हो सकता है। झारखंड की राजनीति में विपक्षी दलों को कड़ी टक्कर देने और पार्टी के भीतर आपसी समन्वय को बेहतर बनाने की बड़ी जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर आ गई है।
सौरभ सिंह और निवेदिता सिंह को मिली सह-प्रभारी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
केवल मुख्य प्रभारी ही नहीं, बल्कि झारखंड में पार्टी संगठन को और अधिक मजबूत और धारदार बनाने के लिए केंद्रीय नेतृत्व ने सह-प्रभारियों के रूप में भी मजबूत चेहरों को मैदान में उतारा है। छत्तीसगढ़ के पूर्व विधायक सौरभ सिंह और बिहार विधान परिषद की पूर्व सदस्य व सासाराम की कद्दावर नेत्री निवेदिता सिंह को झारखंड का सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है। छत्तीसगढ़ और बिहार की सीमाओं से सटे होने तथा वहां की राजनीतिक नब्ज को अच्छी तरह समझने के कारण इन दोनों सह-प्रभारियों की नियुक्ति को भी एक बेहद सधा हुआ राजनीतिक कदम माना जा रहा है। इन तीनों नेताओं की तिकड़ी झारखंड में भाजपा के सांगठनिक विस्तार को नई गति देने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रही है।
झारखंड भाजपा में बड़े बदलाव से कार्यकर्ताओं में जोश, आगामी रणनीतियों पर टिकी नजरें
जैसे ही केंद्रीय नेतृत्व द्वारा गजेंद्र सिंह पटेल को झारखंड का नया प्रभारी बनाए जाने की आधिकारिक घोषणा हुई, राज्यभर के पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में जश्न का माहौल बन गया। हजारीबाग, रांची समेत विभिन्न जिलों के स्थानीय नेताओं ने इस नियुक्ति का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि उनके मार्गदर्शन में झारखंड में पार्टी का सांगठनिक ढांचा और अधिक मजबूत होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नए प्रभारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के भीतर सभी गुटों को एकजुट करना और आगामी चुनावी अभियानों के लिए बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखना होगा। बहरहाल, इस बड़े फेरबदल के बाद झारखंड के राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों पर मंथन शुरू हो चुका है।