2 साल की उम्र में कैंसर से लड़ीं, विवेक ओबेरॉय ने लिया था गोद: जानिए कौन हैं सहारा शाह, जिन्होंने मौत को मात देकर अब फिल्मों में हीरोइन बनने का सपना किया सच

2 साल की उम्र में कैंसर से लड़ीं, विवेक ओबेरॉय ने लिया था गोद: जानिए कौन हैं सहारा शाह, जिन्होंने मौत को मात देकर अब फिल्मों में हीरोइन बनने का सपना किया सच

बॉलीवुड गलियारों से जब भी किसी सितारे की दरियादिली और समाज सेवा की बात आती है, तो अभिनेता विवेक ओबेरॉय का नाम हमेशा अग्रिम पंक्ति में लिया जाता है। हाल ही में कैंसर अवेयरनेस और 'रोज डे' के एक विशेष कार्यक्रम के दौरान मंच पर एक ऐसा भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं। यह कहानी है सहारा शाह की—एक ऐसी जांबाज लड़की, जिसने महज दो साल की मासूम उम्र में ब्लड कैंसर जैसी घातक बीमारी से जंग लड़ी, मौत के मुंह से बाहर निकलीं और अब भारतीय सिनेमा के रुपहले पर्दे पर बतौर अभिनेत्री अपना करियर शुरू करने जा रही हैं। उन्हें गोद लेकर नई जिंदगी देने वाले कोई और नहीं, बल्कि खुद विवेक ओबेरॉय हैं।

जब महज दो साल की उम्र में सहारा को हुआ था ल्यूकेमिया, विवेक बने जीवनदाता

सहारा शाह की जिंदगी की शुरुआत बेहद दर्दनाक और संघर्षपूर्ण रही। जब वे सिर्फ दो वर्ष की थीं, तब डॉक्टरों ने उन्हें एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) डायग्नोज किया। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी सक्षम नहीं थी कि वे महंगे कीमोथेरेपी और अस्पताल के बड़े बिलों का बोझ उठा सकें। उस नाजुक मोड़ पर जब बच्ची की जिंदगी की उम्मीदें टूटने लगी थीं, तब विवेक ओबेरॉय देवदूत बनकर सामने आए। विवेक ने न केवल सहारा के संपूर्ण कैंसर इलाज, दवाओं और थेरेपी का पूरा वित्तीय जिम्मा उठाया, बल्कि भावनात्मक रूप से सहारा को अपनी बेटी की तरह गोद लेकर उनके सिर पर पिता जैसा साया रख दिया। डॉक्टरों की कड़ी मेहनत और विवेक के सहयोग की बदौलत सहारा ने कैंसर को जड़ से हरा दिया और आज वे पूरी तरह से कैंसर-मुक्त (Cancer-Free) स्वस्थ जीवन जी रही हैं।

कैंसर अवेयरनेस मंच पर जब छलके आंसू: 'पापा ने मुझे नई सांसें दीं'

हाल ही में आयोजित एक सार्वजनिक मंच पर जब सहारा शाह ने माइक थामा, तो उन्होंने भरे गले से अपने संघर्ष और विवेक ओबेरॉय के प्रति अपने सम्मान को साझा किया। सहारा ने कहा कि यदि उस वक्त विवेक ओबेरॉय ने उनका हाथ न थामा होता, तो शायद आज वे इस दुनिया में जीवित न होतीं। उन्होंने विवेक को अपना असली मसीहा और मार्गदर्शक बताया। अपनी बेटी के रूप में पली-बढ़ी सहारा को स्वस्थ और मंच पर आत्मविश्वास से खड़ा देख विवेक ओबेरॉय भी अपने आंसू नहीं रोक पाए और उन्होंने मंच पर ही सहारा को गले लगा लिया। यह वीडियो सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग विवेक के इस मानवीय कदम की दिल खोलकर सराहना कर रहे हैं।

अब फिल्मों में हीरोइन बनेंगी सहारा शाह: एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने की तैयारी

कैंसर के खिलाफ जंग जीतना सहारा के हौसले का सिर्फ एक हिस्सा था; उनका असली सपना हमेशा से कला और अभिनय की दुनिया में अपना नाम कमाना रहा है। अब युवा हो चुकीं सहारा शाह ने औपचारिक रूप से एक्टिंग की ट्रेनिंग पूरी कर ली है और वे जल्द ही बड़े पर्दे पर बतौर मुख्य अभिनेत्री अपनी फिल्मी पारी की शुरुआत करने वाली हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, सहारा को एक बड़े प्रोजेक्ट के लिए कास्ट किया गया है, जिसकी आधिकारिक घोषणा जल्द ही की जाएगी। विवेक ओबेरॉय ने भी गर्व से बताया कि सहारा न केवल एक सर्वाइवर हैं बल्कि एक असाधारण प्रतिभाशाली कलाकार हैं, जो अपनी मेहनत के दम पर सिनेमा में अपनी पहचान बनाएंगी।

हजारों कैंसर पीड़ित बच्चों के लिए मसीहा हैं विवेक ओबेरॉय

सहारा शाह की कहानी कोई इकलौता उदाहरण नहीं है। विवेक ओबेरॉय पिछले दो दशकों से 'कैंसर पेशेंट्स एड एसोसिएशन' (CPAA) और अपनी सामाजिक संस्थाओं के जरिए हजारों बच्चों के कैंसर के इलाज का खर्च उठा रहे हैं। उन्होंने अब तक 2.5 लाख से अधिक गरीब बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और पुनर्वास में प्रत्यक्ष मदद की है। जब सुनामी आई थी या अन्य कोई राष्ट्रीय आपदा, विवेक हमेशा जमीन पर उतरकर राहत कार्यों में सबसे आगे रहे हैं। सहारा शाह की यह कामयाबी विवेक के उन अनगिनत परोपकारी प्रयासों का सबसे सुंदर और प्रेरणादायी चेहरा बनकर देश के सामने आई है।