झारखंड में जेएसएससी जेई पेपर लीक का मास्टरमाइंड निकला आईआईटी का पूर्व छात्र
प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ करने वाले शातिर अपराधियों का पर्दाफाश करते हुए झारखंड पुलिस और जांच एजेंसियों ने एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा किया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की जूनियर इंजीनियर (JE) परीक्षा के पेपर लीक मामले में एसआईटी (SIT) की जांच के दौरान जो मुख्य आरोपी पकड़ा गया है, वह कोई आम नकलची या छोटा दलाल नहीं, बल्कि देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी (IIT) का पूर्व छात्र निकला है। उच्च तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद इस शख्स ने शॉर्टकट तरीके से दौलत कमाने की हवस में युवाओं के भविष्य के साथ सौदा करना चुना। पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि यह शातिर दिमाग आरोपी जेएसएससी जेई के प्रश्नपत्रों को लीक करके उन्हें ब्लैक मार्केट में 15 लाख रुपये तक की भारी-भरकम कीमत में बेचता था। इस खुलासे के बाद से राज्य के प्रशासनिक हलकों और शैक्षणिक संस्थानों में हड़कंप मच गया है।
#1. आईआईटी से पढ़ाई और फिर अपराध की दुनिया में एंट्री: कैसे रची गई पेपर लीक की साजिश?
एसआईटी की शुरुआती जांच और तकनीकी सर्विलांस से पता चला है कि गिरफ्तार आरोपी ने देश के एक नामी आईआईटी संस्थान से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी। तकनीकी रूप से अत्यधिक कुशल होने के कारण वह परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा में सेंध लगाने के नए-नए और आधुनिक तरीके तलाशता था। उसने अपने कुछ अन्य साथियों और दलालों के साथ मिलकर एक ऐसा सिंडिकेट तैयार किया था, जो परीक्षा से कुछ दिन पहले ही गुप्त तरीके से प्रश्नपत्रों की डिजिटल कॉपी या प्रिंट हासिल कर लेता था। इस शातिर दिमाग ने अपनी तकनीकी दक्षता का इस्तेमाल पुलिस और आयोग की नजरों से बचकर अवैध रूप से प्रश्नपत्र लीक करने में किया, जिससे बेरोजगार युवाओं की मेहनत पर पानी फिर रहा था।
#1. 15 लाख रुपये में होती थी डील: ऐसे चलता था पूरा पेपर लीक का काला कारोबार
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस गिरोह का नेटवर्क काफी फैला हुआ था। झारखंड और आसपास के राज्यों में सरकारी नौकरी की लालसा रखने वाले आर्थिक रूप से सक्षम अभ्यर्थियों से यह रैकेट संपर्क साधता था। जेएसएससी जेई परीक्षा के एक-एक प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी (Answer Key) के बदले 15 लाख रुपये की मोटी रकम तय की जाती थी। सौदा तय होने के बाद अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले ही गुप्त ठिकानों पर प्रश्नपत्र रटाए जाते थे या डिजिटल माध्यम से मुहैया कराए जाते थे। इस अवैध कमाई के जरिए आरोपी ने कम समय में ही अकूत संपत्ति और लग्जरी लाइफस्टाइल बना ली थी, लेकिन आखिरकार कानून के लंबे हाथों ने इस शातिर इंजीनियर को उसकी मंजिल तक पहुंचा ही दिया।
#1. बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ और झारखंड में सियासी भूचाल
झारखंड में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने राज्य के लाखों बेरोजगार युवाओं के भीतर गहरा असंतोष और आक्रोश पैदा कर दिया है। युवा सालों-साल तक लाइब्रेरियों और कमरों में बैठकर दिन-रात कड़ी मेहनत करते हैं, और जब परीक्षा का दिन आता है तो इस तरह के शातिर लोग पैसों के बल पर अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरी की कुर्सी पर बिठा देते हैं। इस घटना के सामने आने के बाद विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने सरकार व आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। छात्रों का कहना है कि जब तक इस पूरे सिंडिकेट के राजनीतिक और बड़े प्रशासनिक संरक्षकों को बेनकाब करके उन्हें कठोर सजा नहीं दी जाती, तब तक पारदर्शी परीक्षाएं होना असंभव है।
#1. एसआईटी की कार्रवाई और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे की संभावना
झारखंड पुलिस और जांच एजेंसियों का कहना है कि आईआईटी के पूर्व छात्र की गिरफ्तारी इस पूरे रैकेट की जड़ तक पहुंचने में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित होगी। पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि इस लीक कांड में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के भीतर का कौन-कौन सा कर्मचारी या अधिकारी शामिल था, क्योंकि बिना अंदरूनी मदद के इतने बड़े स्तर पर प्रश्नपत्र बाहर आना मुमकिन नहीं है। पुलिस रिमांड पर लेकर आरोपी से पूछताछ की जा रही है और उम्मीद है कि इस काले कारोबार से जुड़े कई और बड़े चेहरों से जल्द ही पर्दा उठेगा। सरकार ने भी सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि नकल माफियाओं के खिलाफ बुलडोजर और कानूनी कार्रवाई में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी ताकि युवाओं का सिस्टम से भरोसा न उठे।