झारखंड के शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का निधन, सीएम हेमंत सोरेन के करीबी झामुमो नेता को दिल का दौरा

झारखंड के शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का निधन, सीएम हेमंत सोरेन के करीबी झामुमो नेता को दिल का दौरा

झारखंड की राजनीति से इस वक्त की बेहद दुखद और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जहां हेमंत सरकार में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा और नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का अचानक दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ने से निधन हो गया है। मिली जानकारी के अनुसार, गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र से दो बार के विधायक और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बेहद करीबी माने जाने वाले सुदिव्य कुमार सोनू की शनिवार देर रात अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। सीने में तेज दर्द की शिकायत के बाद उन्हें तुरंत गिरिडीह के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके इस तरह अचानक दुनिया से चले जाने से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) पार्टी सहित पूरे राज्य के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जताया गहरा शोक और दी भावुक विदाई

अपने करीबी सहयोगी और कैबिनेट मंत्री के असामयिक निधन पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बेहद भावुक होते हुए गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर अपने संदेश में लिखा कि सोनू भैया केवल एक वरिष्ठ सहयोगी या राजनीतिक साथी नहीं बल्कि उनके लिए बड़े भाई की तरह थे जो हर मुश्किल वक्त में मजबूती से उनके साथ खड़े रहे। झामुमो पार्टी ने भी आधिकारिक तौर पर बयान जारी करते हुए इसे पार्टी, सरकार और पूरे झारखंड के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है। पार्टी नेताओं ने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू ने हमेशा झारखंड की पहचान, अधिकारों और जनहित के मुद्दों के लिए कड़ा संघर्ष किया, जिसे हमेशा याद रखा जाएगा। हाल ही में वे सरकारी कामकाज और कई महत्वपूर्ण बैठकों में पूरी तरह सक्रिय नजर आए थे, जिससे उनका यकायक यूं चले जाना हर किसी को स्तब्ध कर गया है।

राजनीतिक सफर और झारखंड की प्रशासनिक व्यवस्था पर असर

गिरिडीह सीट से लगातार शानदार जीत दर्ज कर राजनीतिक फलक पर छाए सुदिव्य कुमार सोनू हेमंत सोरेन कैबिनेट के सबसे भरोसेमंद और प्रमुख मंत्रियों में गिने जाते थे। उनके पास उच्च शिक्षा, नगर विकास, पर्यटन, कला-संस्कृति और खेलकूद जैसे कई अहम विभागों की जिम्मेदारी थी, जिन्हें वे पूरी निष्ठा के साथ संभाल रहे थे। पिछले दिनों राज्य में आए छात्र आंदोलनों और विभिन्न नियुक्तियों से जुड़े मसलों को सुलझाने में भी उनकी भूमिका बेहद निर्णायक रही थी। उनके निधन से जहां एक तरफ प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर बड़ा खालीपन आ गया है, वहीं दूसरी ओर उनके पैतृक आवास और अस्पतालों में शोक व्यक्त करने वाले समर्थकों, पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों का तांता लगा हुआ है। प्रशासन द्वारा उनके अंतिम संस्कार और राजकीय सम्मान की तैयारियों को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है, जबकि पूरा प्रदेश इस समय अपने एक जांबाज जननेता को नम आंखों से अंतिम विदाई दे रहा है