फर्जी ST सर्टिफिकेट के सहारे MBBS में लिया था दाखिला, RIMS ने छात्र का एडमिशन किया रद्द, मेडिकल जगत में मचा हड़कंप
झारखंड के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS), रांची से मेडिकल शिक्षा जगत को हिलाकर रख देने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। रिम्स प्रबंधन ने एक बेहद सख्त कदम उठाते हुए एमबीबीएस (MBBS) के एक छात्र का दाखिला तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि उक्त छात्र ने अनुसूचित जनजाति (ST) का फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाकर मेडिकल सीट पर कब्जा किया था। इस धोखाधड़ी के सामने आने के बाद न केवल रिम्स प्रशासन बल्कि झारखंड के स्वास्थ्य महकमे और नीट (NEET) की तैयारी कर रहे छात्रों के बीच भी हड़कंप मच गया है।
आंतरिक जांच समिति और स्क्रूटनी में पकड़ा गया फर्जीवाड़े का खेल
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह मामला तब उजागर हुआ जब संस्थान की एक विशेष स्क्रूटनी कमेटी और प्रशासनिक विंग ने दाखिल दस्तावेजों की दोबारा गहनता से जांच की। जांच के दौरान छात्र द्वारा जमा किए गए एसटी (ST) सर्टिफिकेट के सीरियल नंबर और जारी करने वाले स्थानीय कार्यालय के रिकॉर्ड में भारी विसंगतियां पाई गईं। जब स्थानीय प्रशासन से इस प्रमाण पत्र का सत्यापन (Verification) कराया गया, तो साफ हो गया कि छात्र ने आरक्षित वर्ग की सीट हड़पने के लिए जाली दस्तावेजों का सहारा लिया था। रिपोर्ट सामने आते ही रिम्स निदेशक और गवर्निंग बॉडी ने बिना किसी देरी के छात्र का एडमिशन कैंसिल करने का आदेश जारी कर दिया।
योग्य और जरूरतमंद आदिवासी छात्रों के हक पर डाका डालने की कोशिश
मेडिकल और शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे देश के प्रीमियम मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेना एक गंभीर आपराधिक कृत्य है। यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि उन योग्य और जरूरतमंद आदिवासी (ST) छात्रों के हक पर भी सीधा डाका है जो दिन-रात मेहनत करके नीट परीक्षा पास करते हैं। रिम्स प्रशासन के इस कड़े रुख की स्थानीय छात्र संगठनों ने जमकर सराहना की है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल एडमिशन रद्द करना काफी नहीं है, बल्कि दोषी छात्र और फर्जी सर्टिफिकेट बनाने वाले रैकेट के खिलाफ सख्त कानूनी और पुलिसिया कार्रवाई होनी चाहिए।
झारखंड के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी दस्तावेजों की जांच होगी तेज
रातों-रात सुर्खियों में आए इस 'रांची मेडिकल फ्रॉड' के बाद सूबे की लोकल राजनीति और ब्यूरोक्रेसी में भी हलचल तेज हो गई है। एआई सर्च, आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और स्थानीय प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस घटना के बाद झारखंड सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के अन्य सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों को अलर्ट जारी कर दिया है। अब राज्य के सभी चिकित्सा संस्थानों में आरक्षित कोटे के तहत दाखिला लेने वाले छात्रों के मूल दस्तावेजों और जाति प्रमाण पत्रों की नए सिरे से कड़ाई से जांच की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह के फर्जीवाड़े को पूरी तरह से रोका जा सके।