देवघर में राजकीय श्रावणी मेला का भव्य समापन, बाबा बैद्यनाथ धाम में स्पर्श पूजा की फिर से शुरुआत और 60 लाख से अधिक भक्तों का जलार्पण
झारखंड के देवघर में विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक राजकीय श्रावणी मेला इस वर्ष अपने पारंपरिक और आध्यात्मिक उल्लास के साथ सफलता पूर्वक संपन्न हो चुका है। मेले के समापन के साथ ही बाबा बैद्यनाथ धाम के गर्भ गृह में श्रद्धालुओं के लिए स्पर्श पूजा की बहुप्रतीक्षित व्यवस्था को दोबारा शुरू कर दिया गया है, जिससे देश भर से आने वाले शिव भक्तों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। पूरे एक महीने तक चले इस पवित्र राजकीय अनुष्ठान के दौरान कठिन मौसम, बारिश और भारी भीड़ के बावजूद शिव भक्तों की अगाध आस्था में कोई कमी नहीं आई। श्रावणी मेले के इस पूरे सीजन के दौरान आंकड़े बताते हैं कि देश और दुनिया के अलग-अलग कोनों से आए 60 लाख से अधिक शिव भक्तों ने पवित्र शिवलिंग पर जलार्पण कर अपनी मनोकामनाएं मांगी और बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस बार जिला प्रशासन, मंदिर प्रबंधन बोर्ड और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के आपसी समन्वय से मेला का संचालन बेहद सुचारू रूप से किया गया, जिससे लाखों श्रद्धालुओं को सुगमता के साथ भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने का दुर्लभ अवसर प्राप्त हुआ।
ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व वाला बाबा बैद्यनाथ धाम का श्रावणी मेला
सावन के पवित्र महीने में देवघर की पावन भूमि पर आयोजित होने वाला राजकीय श्रावणी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति, अटूट आस्था और सांस्कृतिक एकता का एक जीवंत प्रतीक है। देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक मनोकामना लिंग के रूप में स्थापित बाबा बैद्यनाथ के दरबार में सावन के महीने में हर साल करोड़ों की संख्या में कांवड़िए और श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार के मेले का स्वरूप बेहद खास रहा क्योंकि झारखंड सरकार और जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं, पेयजल और ठहरने के लिए चाक-चौबंद इंतजाम किए थे। सुल्तानगंज से उत्तर वाहिनी गंगा का पवित्र जल भरकर लगभग 105 किलोमीटर की कठिन कांवड़ यात्रा तय करने के बाद शिवभक्त बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित करने देवघर पहुंचते हैं। इस कठिन मार्ग पर नंगे पैर चलने वाले श्रद्धालुओं की सेवा के लिए जगह-जगह भंडारे और विश्राम गृह बनाए गए थे, जिन्होंने इस पूरी यात्रा को और अधिक सुगम और यादगार बना दिया।
मेला संपन्न होने के बाद गर्भ गृह में दोबारा शुरू हुई स्पर्श पूजा
श्रावणी मेले के दौरान अत्यधिक भीड़ और सुरक्षा के कड़े मानकों को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रशासन ने गर्भगृह के अंदर स्पर्श पूजा पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी थी, ताकि सभी भक्तों को कम समय में सुगमता से अर्घा के माध्यम से जलार्पण कराया जा सके। मेले के आधिकारिक समापन के साथ ही अब गर्भ गृह के कपाट सामान्य नियमों के तहत संचालित होने लगे हैं और भक्तों को एक बार फिर से बाबा बैद्यनाथ के सीधे स्पर्श दर्शन और पूजन का सौभाग्य मिलने लगा है। स्पर्श पूजा की इस पुनः शुरुआत की खबर फैलते ही देवघर में स्थानीय पंडा समाज और दूर-दराज से आने वाले भक्तों में खुशी की लहर दौड़ गई है। मंदिर प्रबंधन का मानना है कि स्पर्श पूजा शुरू होने से अब आने वाले दिनों में सामान्य दिनों की तरह ही श्रद्धालु तसल्ली से भगवान शिव की आराधना कर सकेंगे और गर्भगृह के भीतर का आध्यात्मिक अनुभव और अधिक गहरा हो जाएगा।
सुरक्षा, सुगमता और बेहतर प्रबंधन के साथ रिकॉर्ड 60 लाख श्रद्धालुओं ने किया जलार्पण
इस वर्ष के राजकीय श्रावणी मेले का सबसे बड़ा आकर्षण यह रहा कि प्रशासनिक सूझबूझ और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से रिकॉर्ड 60 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने सुरक्षित और शांतिपूर्ण तरीके से जलार्पण किया। जिला प्रशासन द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से भीड़ पर लगातार निगरानी रखी जा रही थी, जिससे किसी भी तरह की भगदड़ या असुविधा की स्थिति से पूरी तरह बचा जा सका। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जगह-जगह मेडिकल कैंप और एम्बुलेंस की तैनाती की गई थी, जिससे मौसम में बदलाव या लंबी कतारों के कारण बीमार पड़ने वाले श्रद्धालुओं को तुरंत प्राथमिक उपचार मिल सका। पेयजल और स्वच्छता के व्यापक प्रबंधों के कारण इतने विशाल जनसैलाब के बावजूद देवघर का मेला क्षेत्र पूरी तरह व्यवस्थित और साफ-सुथरा नजर आया, जिसकी सराहना देश भर से आए साधु-संतों और पर्यटकों ने खुले दिल से की।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को मिला नया पंख
श्रावणी मेले का यह पूरा महीना देवघर और आसपास के जिलों के लिए आर्थिक समृद्धि का एक बड़ा अवसर लेकर आता है, जिसमें स्थानीय दुकानदारों, होटल व्यवसायियों, ट्रांसपोर्ट संचालकों और हस्तशिल्प कारीगरों का व्यापार अपने चरम पर होता है। पेड़ा उद्योग, जो देवघर की खास पहचान है, उसने इस साल बिक्री के नए रिकॉर्ड बनाए और देश के कोने-कोने में बाबा नगरी का प्रसाद पहुंचा। होटल और होमस्टे पूरी तरह बुक रहे और परिवहन सेवाओं से जुड़े लोगों को भी इस ऐतिहासिक आयोजन से बेहतरीन रोजगार के अवसर मिले। झारखंड सरकार की ओर से इस बार सांस्कृतिक कार्यक्रमों और धार्मिक आयोजनों का भी भव्य स्तर पर आयोजन किया गया था, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय लोक कला और संस्कृति को भी राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिली।
भविष्य की तैयारियों और कांवड़ यात्रा के सुखद अनुभवों की अनूठी यादें
श्रावणी मेले के समापन के साथ ही देवघर में अब अगले साल होने वाले आयोजन को लेकर समीक्षा और नई रूपरेखा तैयार करने का सिलसिला शुरू हो चुका है, ताकि भविष्य में व्यवस्थाओं को और अधिक उन्नत बनाया जा सके। बोल बम के नारों से गूंजने वाली यह पावन धरा भले ही अब कुछ समय के लिए शांत हो रही है, लेकिन लाखों कांवड़ियों के दिलों में इस यात्रा की यादें हमेशा तरोताजा रहेंगी। कठिन रास्तों को पार करते हुए भगवा वस्त्र पहने शिव भक्तों का यह महाकुंभ एक बार फिर से साबित कर गया कि भारत की सनातन संस्कृति में आस्था की जड़ें कितनी गहरी और मजबूत हैं। बाबा बैद्यनाथ के दरबार में माथा टेकने वाले हर एक श्रद्धालु की मनोकामनाएं पूरी हों और यह पावन नगरी हमेशा इसी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहे, यही कामना लेकर भक्त अपने घरों को लौट रहे हैं।