दिवाली पर छाई गहरी शोक की लहर: चार बार के विधायक और पूर्व मंत्री डॉ. जसवंत यादव का निधन
दीपावली के पावन और उल्लास से भरे पर्व के दिन राजस्थान के राजनीतिक गलियारों और अलवर क्षेत्र से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। राज्य के वरिष्ठ और कद्दावर राजनेता, बहरोड़ विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के वर्तमान विधायक तथा पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. जसवंत सिंह यादव अब हमारे बीच नहीं रहे। लंबे समय से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे डॉ. यादव ने जयपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही उनके पैतृक क्षेत्र बहरोड़, अलवर सहित पूरे राजस्थान में शोक की लहर दौड़ गई है। दीपावली के दिन प्रदेश ने एक ऐसा जनप्रिय नेता खो दिया है, जिसने अपने चार दशक लंबे राजनीतिक सफर में हमेशा जनता के अधिकारों और क्षेत्रीय विकास के लिए कड़ा संघर्ष किया। उनके निधन के बाद से राजनीतिक दिग्गजों और समर्थकों द्वारा लगातार श्रद्धांजलि देने का सिलसिला जारी है।
लंबे समय से गंभीर बीमारी से जंग और अस्पताल में ली अंतिम सांस
डॉ. जसवंत यादव पिछले काफी लंबे समय से कैंसर (प्रोस्टेट कैंसर) जैसी खतरनाक बीमारी से मुकाबला कर रहे थे। बीमारी के बावजूद उनके भीतर का जननेता और सेवाभाव कभी कम नहीं हुआ, और वे अपनी शारीरिक तकलीफों को दरकिनार कर लगातार क्षेत्र की जनता के बीच सक्रिय बने रहे थे। हाल ही में सेहत अधिक बिगड़ने के बाद उन्हें जयपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा था। तमाम कोशिशों के बावजूद वे इस जानलेवा बीमारी से अपनी लंबी जंग हार गए और रविवार सुबह करीब 8 बजकर 15 मिनट पर उन्होंने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। उनके निधन की आधिकारिक सूचना उनके पुत्र मोहित यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की, जिसे पढ़ते ही उनके चाहने वालों और पार्टी कार्यकर्ताओं पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
शानदार राजनीतिक सफर: चार बार विधायक, सांसद और कैबिनेट मंत्री का पद संभाला
डॉ. जसवंत सिंह यादव का राजनीतिक करियर उपलब्धियों और जनसेवा की बेमिसाल मिसाल रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करते हुए साल 1998 में पहली बार मुंडावर विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी। इसके बाद उनकी लोकप्रियता और राजनीतिक सूझबूझ का दायरा लगातार बढ़ता चला गया। वे अपने राजनीतिक जीवन में कुल चार बार विधायक चुने गए। इसके अलावा, साल 1999 के आम चुनावों में उन्होंने अलवर लोकसभा सीट से शानदार जीत हासिल की थी और संसद पहुंचकर क्षेत्र की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया था। राजस्थान सरकार में उन्होंने कैबिनेट मंत्री के रूप में भी महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली और प्रशासन में अपनी मजबूत पकड़ का अहसास कराया। अलवर जिले की राजनीति में उन्हें एक मजबूत स्तंभ माना जाता था, जिन्होंने बिना किसी भेदभाव के हमेशा आम जनता के हितों के लिए काम किया।
राजनीतिक जगत में शोक की लहर, मुख्यमंत्री और दिग्गजों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
डॉ. जसवंत यादव के निधन की खबर सामने आते ही पूरे राजनीतिक गलियारे में शोक छा गया। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली समेत पक्ष और विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है। नेताओं ने अपने शोक संदेश में कहा कि डॉ. यादव का पूरा जीवन जनसेवा, समर्पण और क्षेत्र के विकास के लिए समर्पित रहा। उनका यूं चला जाना न केवल भारतीय जनता पार्टी के लिए, बल्कि समूचे राजस्थान और खासकर अलवर परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है। परिवार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव सिलपटा (खैरथल-तिजारा) में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा, जहां उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए हजारों की संख्या में समर्थकों और गणमान्य लोगों के जुटने की उम्मीद है।