झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का अनौपचारिक और सरप्राइज दौरा
राजनीतिक गलियारों और वीवीआईपी दौरों की चकाचौंध से दूर जब देश के बड़े नेता आम जनता के बीच अचानक आ जाते हैं, तो वह नजारा वाकई देखने लायक होता है। कुछ ऐसा ही मनमोहक और हैरान करने वाला वाकया झारखंड में देखने को मिला, जब राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी सह विधायक कल्पना सोरेन अचानक अपनी सभी प्रशासनिक सुरक्षा और प्रोटोकॉल के बंधनों को थोड़ा दरकिनार कर सड़क मार्ग से एक छोटे से कस्बे में जा पहुंचे। मुख्यमंत्री का यह सरप्राइज दौरा न केवल स्थानीय प्रशासन के लिए चौंकाने वाला था, बल्कि आम जनता के लिए एक यादगार पल बन गया। आम इंसान की तरह सड़कों का जायजा लेते हुए सीएम का यूं अचानक जमीन पर उतरना हर तरफ चर्चा का विषय बन गया है।
पैतृक गांव नेमरा से लौटने के दौरान अचानक बदला रूट
मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पैतृक गांव नेमरा से वापस लौट रहे थे। इस दौरान उनका कोई भी पूर्व निर्धारित या आधिकारिक चुनावी कार्यक्रम तय नहीं था। वे पूरी तरह से एक सामान्य यात्री और मार्ग के मु मुआयना करने वाले मुखिया की तरह सफर कर रहे थे। सफर के दौरान उन्होंने सबसे पहले बोकारो जिले के अंतर्गत आने वाले इलाके में निर्माणाधीन कसमार-बरलंगा सड़क मार्ग की गुणवत्ता और प्रगति का खुद अपनी आंखों से जायजा लिया। सड़क की स्थिति को परखने के बाद उनका काफिला जैसे ही कसमार के मुख्य तीनकोनिया चौक के पास पहुंचा, वहां का माहौल अचानक पूरी तरह बदल गया और मुख्यमंत्री ने अपनी गाड़ी रुकवा ली।
तीनकोनिया चौक की प्रसिद्ध दुकान पर लगाई 'सरकार' और खाए पकौड़े
कसमार के तीनकोनिया चौक पर स्थित कुणाल जायसवाल की छोटी सी चाय-पकौड़े की दुकान पर उस समय आम दिनों की तरह ही चहल-पहल थी। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि राज्य के मुख्यमंत्री और लोकप्रिय नेता अचानक उनकी इस छोटी सी दुकान की चौखट पर आ खड़े होंगे। सीएम हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन जैसे ही दुकान के अंदर पहुंचे, वहां मौजूद दुकान संचालक और ग्राहकों की आंखें फटी की फटी रह गईं। बिना किसी तामझाम के दोनों नेताओं ने एक आम नागरिक की तरह स्टूल पर बैठकर गरमा-गरम पकौड़ों का आनंद लिया। इतना ही नहीं, उन्होंने वहां मौजूद स्थानीय ग्रामीणों और बच्चों को भी अपने हाथों से पकौड़े खिलाए और बड़े ही आत्मीयता के साथ उनका हाल-चाल जाना।
मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर गदगद हुए स्थानीय ग्रामीण
चाय और पकौड़े की दुकान पर मुख्यमंत्री और विधायक कल्पना सोरेन को इस तरह सहज रूप में बैठे हुए देखकर आसपास के दुकानदारों और राहगीरों की भारी भीड़ जमा हो गई। लोगों में अपने प्रदेश के मुखिया के साथ सेल्फी लेने और मोबाइल कैमरे में इस पल को कैद करने की होड़ सी मच गई। मुख्यमंत्री ने भी किसी को निराश नहीं किया और बेहद गर्मजोशी के साथ सभी लोगों से बातचीत की। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले उन्होंने कभी किसी बड़े राजनेता को इस तरह बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक एक साधारण सी दुकान पर आकर चाय-पकौड़े का लुत्फ उठाते हुए नहीं देखा था। यह सहजता ही थी जिसने वहां मौजूद हर शख्स का दिल जीत लिया।
सेवाती घाटी का निरीक्षण कर पर्यटन विकास पर की चर्चा
कसमार बाजार में कुछ वक्त बिताने और स्थानीय लोगों से संवाद करने के बाद मुख्यमंत्री का काफिला आगे बढ़ा। वापसी के रास्ते में उन्होंने बेहद खूबसूरत मानी जाने वाली सेवाती घाटी का भी दौरा किया और वहां रुककर क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया। इस अचानक दौरे की भनक लगते ही बोकारो के उपायुक्त (DC) अजय नाथ झा समेत कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी तुरंत मौके पर पहुंच गए। घाटी के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ इस क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ावा देने और सड़क मार्ग को और अधिक सुगम बनाने को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा की।
जमीनी हकीकत जानने का यह अनूठा अंदाज बना चर्चा का विषय
राजनीति में अक्सर नेताओं के दौरे भारी-भरकम लाव-लश्कर और पुलिस सुरक्षा के साए में होते हैं, जहां आम जनता अपनी समस्याएं तक खुलकर नहीं कह पाती है। ऐसे में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का यह कसमार दौरा और सड़क किनारे आम दुकान पर बैठकर 'पकौड़े पर चर्चा' करना इस बात का सुबूत है कि जनता के बीच सीधे संवाद से ही जमीनी हकीकत का सही अंदाजा लगाया जा सकता है। इस छोटी सी मुलाकात और अनौपचारिक दौरे ने साबित कर दिया कि एक जननेता किस तरह अपनी संस्कृति और जमीन से जुड़ा रह सकता है। बोकारो और आसपास के पूरे इलाके में अब यही घटना सबसे बड़ा और खुशनुमा चर्चा का विषय बनी हुई है, और लोग इस सादगी की जमकर तारीफ कर रहे हैं।