झारखंड की राजधानी रांची में सजा अद्भुत धार्मिक और सांस्कृतिक मेला

झारखंड की राजधानी रांची में सजा अद्भुत धार्मिक और सांस्कृतिक मेला

झारखंड की राजधानी रांची में शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर इस बार आस्था, कला और आधुनिक इंजीनियरिंग का एक ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है, जो हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। रांची के विभिन्न पूजा पंडालों में इस बार देश ही नहीं बल्कि विदेशों के प्रसिद्ध मंदिरों और ऐतिहासिक धरोहरों की हूबहू प्रतिकृतियां (Replica) तैयार की गई हैं। शहर की सड़कों पर उमड़ती भीड़ और चारों तरफ गूंजते मां दुर्गा के जयकारों के बीच लोग इन भव्य पंडालों को देखने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। यदि आप भी अपने परिवार के साथ इन अलौकिक रूपों के दर्शन करने की योजना बना रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले शहर के बदले हुए ट्रैफिक रूट और प्रमुख पंडालों की खासियत के बारे में जरूर जान लें।

रातू रोड में अमेरिका के 'टेंपल ऑफ टुगेदर' की अनूठी झलक

इस बार रांची के रातू रोड इलाके में अमेरिका के नेवादा में स्थित प्रसिद्ध 'टेंपल ऑफ टुगेदर' की थीम पर एक बेहद भव्य और आकर्षक पंडाल का निर्माण किया गया है। इस पंडाल की सबसे बड़ी खासियत इसकी पारंपरिक लेबनानी बुनाई शैली और बारीक नक्काशी का अनूठा संयोजन है। कारीगरों ने लकड़ी, प्लाई और पूरी तरह से पर्यावरण-अनुकूल (Eco-friendly) सामग्रियों का उपयोग करके इसे बिल्कुल अमेरिका की मूल संरचना जैसा स्वरूप दिया है। इसे देखने के बाद ऐसा प्रतीत होता है मानो दर्शक देश की सीमा लांघकर सीधे अमेरिका के किसी भव्य मंदिर परिसर में पहुंच गए हों।

शहीद चौक के पास वाराणसी के स्वर्वेद महामंदिर का भव्य दीदार

जो श्रद्धालु किन्हीं कारणों से उत्तर प्रदेश के वाराणसी जाकर वहां के प्रसिद्ध स्वर्वेद महामंदिर के दर्शन नहीं कर पाए थे, वे इस बार रांची में ही इस आध्यात्मिक स्थल की भव्यता का अनुभव कर सकते हैं। शहीद चौक के समीप बनाए गए इस पूजा पंडाल को वाराणसी के उसी प्रसिद्ध मंदिर के प्रारूप में ढाला गया है, जो अपनी वास्तुकला और दिव्यता के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। इसकी अलौकिक सजावट और मंदिर की दीवारों पर की गई नक्काशी हर आने जाने वाले को मंत्रमुग्ध कर रही है।

द्वारका नगरी और दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला के भी हो रहे दर्शन

शहर के मेन रोड स्थित समितियों द्वारा गुजरात के प्रसिद्ध द्वारकाधीश मंदिर की प्रतिकृति तैयार की गई है, जहाँ भगवान श्रीकृष्ण की नगरी का अहसास होता है। इस पंडाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समुद्र के भीतर प्राचीन जलमग्न द्वारका के दर्शन और पूजा-अर्चना से जुड़ी तस्वीरों को भी विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया है, जो लोगों के बीच मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इसके अलावा, बकरी बाजार में दक्षिण भारत के प्रसिद्ध तंजावुर के वृहदेश्वर मंदिर की तर्ज पर विशाल पंडाल सजाया गया है, जिसके प्रवेश द्वार पर ध्यानमग्न भगवान भोलेनाथ और नंदी महाराज की प्रतिमाएं भक्तों का मन मोह रही हैं। हरमू कॉलोनी में राजस्थानी संस्कृति और कलाकृति की झलक तथा रातू रोड के गाड़ीखाना में हरिद्वार के शिव शक्ति गंगा स्वर्ण मंदिर के रूप ने रांची की दुर्गा पूजा को ऐतिहासिक बना दिया है।

ट्रैफिक जाम से बचने के लिए प्रशासन द्वारा जारी किया गया नया रूट-चार्ट

पंडालों में उमड़ने वाली भारी भीड़ और वाहनों के दबाव को देखते हुए रांची जिला प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस ने शहर में सुरक्षा तथा यातायात नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम किए हैं। शहर के मुख्य मार्गों पर महासप्तमी से लेकर विजयादशमी तक शाम के समय भारी वाहनों और चार पहिया वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा या उनके मार्ग में बदलाव किया गया है। लालपुर, कचहरी चौक, अलबर्ट एक्का चौक, डंगराटोली और हरमू रोड के आसपास विशेष ट्रैफिक डायवर्जन लागू किए गए हैं ताकि आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

श्रद्धालुओं के लिए विशेष पार्किंग और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

पूजा समितियों ने भी प्रशासन के साथ मिलकर बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर की व्यवस्था की है। इसके साथ ही हरमू मैदान, बरियातू और अन्य प्रमुख पंडालों के पास निर्धारित पार्किंग स्थल बनाए गए हैं जहाँ वाहन खड़े करने के निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षा के लिहाज से च चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती के साथ ही सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जा रही है। ऐसे में यदि आप भी इन भव्य पंडालों का आनंद लेना चाहते हैं, तो ट्रैफिक नियमों का पालन करें और सार्वजनिक परिवहन या तय रूट का ही उपयोग करें।