रूपी सोरेन के श्राद्ध-कर्म में 14 IPS, 42 डीएसपी समेत 2,300 जवान तैनात
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पत्नी दिवंगत रूपी सोरेन के श्राद्ध-कर्म और संस्कार भोज को लेकर रामगढ़ जिले के उनके पैतृक गांव नेमरा में प्रशासनिक और राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है। झारखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले वीवीआईपी मेहमानों, राजनीतिक दिग्गजों और आम जनता की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए राज्य प्रशासन ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। नेमरा से लेकर रामगढ़ तक चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से बचा जा सके।
इस पूरे अनुष्ठान को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए शासन स्तर पर एक मजबूत कमांड स्ट्रक्चर तैयार किया गया है। दुर्गा पूजा के इस त्योहारी सीजन और श्राद्ध कार्यक्रम की दोहरी जिम्मेदारी को संभालते हुए पुलिस महकमे ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। स्थानीय प्रशासन और खुफिया इकाइयां लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं ताकि हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा सके।
सुरक्षा का कड़ा पहरा: 14 आईपीएस, 42 डीएसपी और 2300 अतिरिक्त जवान तैनात
शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए रामगढ़ और नेमरा क्षेत्र को विशेष सुपर जोनों में बांटा गया है। सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभालने के लिए कुल 14 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों और 42 डीएसपी स्तर के तेज-तर्रार अफसरों को मौके पर तैनात किया गया है। इसके अलावा कानून व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए झारखंड सशस्त्र पुलिस (जैप), आईआरबी, झारखंड जगुआर और एटीएस की टीमों समेत 2,300 से अधिक अतिरिक्त जवानों को फील्ड में उतारा गया है।
यह तैनाती संस्कार भोज के संपन्न होने तक पूरी मुस्तैदी के साथ अपनी सेवाएं देगी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए यातायात मार्गों में भी बदलाव किया गया है और गाड़ियों की पार्किंग के लिए विशेष रूप से लुकैया टांड़ जैसे खुले स्थलों को चिन्हित किया गया है, जहाँ से लोगों को गांव तक लाने के लिए 500 से अधिक ऑटो और शिलान्यास वाहन लगाए गए हैं।
संथाल संस्कृति की अनूठी परंपरा: मुख्यमंत्री के ननिहाल से पहुंचा खस्सी और हड़िया
इस दुखद और संवेदनशील घड़ी में आदिवासी और संथाल संस्कृति की गहरी परंपराएं देखने को मिल रही हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के ननिहाल पक्ष और रिश्तेदारों की ओर से पारंपरिक रीति-रिवाजों का पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन किया गया है। परंपरा के अनुसार, मुख्यमंत्री के ननिहाल पक्ष से खस्सी, पारंपरिक पेय हड़िया, माचिस और साल के पत्तों की थालियां (खाला पत्ता) भेंट स्वरूप नेमरा लाई गईं।
झामुमो के वरिष्ठ नेताओं और स्थानीय जानकारों के अनुसार, संथाल समाज में मातृ पक्ष और रिश्तेदारों द्वारा शोक या उत्सव के अवसरों पर इस प्रकार की पारंपरिक वस्तुएं अर्पित करने की पुरानी परंपरा रही है, जिसे आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाया जाता है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद पिछले कई दिनों से पैतृक गांव में रहकर अपनी माता की स्मृति में सुबह-शाम दातून, पानी और भोजन परोसने जैसी सभी पारंपरिक रस्मों को व्यक्तिगत रूप से पूरा कर रहे हैं।
विशाल स्तर पर संस्कार भोज की तैयारी, हजारों लोगों के बैठने के लिए बने भव्य पंडाल
श्राद्ध-कर्म के दौरान आयोजित होने वाले संस्कार भोज में शामिल होने वाले मेहमानों के लिए युद्ध स्तर पर तैयारियां की गई हैं। नेमरा गांव में विशालकाय टेंट और तीन बड़े पंडाल बनाए गए हैं, जिनमें एक साथ हजारों लोग बैठकर भोजन कर सकें। दूर-दूर से आए कारीगर और मिस्त्री पारंपरिक और स्वादिष्ट व्यंजनों के निर्माण में जुटे हुए हैं। भोजन की गुणवत्ता, पेयजल की निरंतर आपूर्ति, साफ-सफाई और सुचारू वितरण के लिए अलग-अलग काउंटरों की व्यवस्था की गई है ताकि किसी भी आगंतुक को असुविधा न हो।
राजनीतिक दलों के कई बड़े नेता, केंद्रीय मंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और झारखंड के कोने-कोने से आ रहे आम लोग दिवंगत रूपी सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित करने लगातार नेमरा पहुंच रहे हैं। इस आयोजन के माध्यम से एक बार फिर झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में एकजुटता और पारंपरिक संस्कारों का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।