Jharkhand : जब दो गुटों की लड़ाई में फंस गया बेकसूर भारतीय सऊदी में विजय की मौत की वो खौफनाक कहानी
News India Live, Digital Desk : झारखंड के गिरिडीह जिले के एक छोटे से गांव बंगराकला में उस वक्त मातम पसर गया, जब घर के लाडले बेटे की मौत की खबर सरहद पार सऊदी अरब (Saudi Arabia) से आई। 35 वर्षीय विजय कुमार महतो, जो अपने परिवार का पेट पालने के लिए हजारों किलोमीटर दूर कमाने गए थे, वहां दो स्थानीय गुटों के बीच हुई गोलीबारी (Crossfire) का शिकार हो गए और उनकी दर्दनाक मौत हो गई।
लेकिन मौत से भी ज्यादा दिल दहला देने वाली है वो कहानी, जो विजय ने मरने से ठीक पहले अपनी पत्नी को भेजे गए आखिरी वॉइस मैसेज (Last Voice Message) में बयां की।
क्या था उस 'आखिरी संदेश' में?
विजय की पत्नी पुष्पा देवी के मोबाइल पर आया वह वॉइस मैसेज अब उनके लिए जिंदगी भर का नासूर बन गया है। उस संदेश में विजय की कांपती और डरी हुई आवाज साफ सुनाई दे रही है। मौत को सामने देखकर उन्होंने अपनी पत्नी से जो आखिरी शब्द कहे, वे पत्थर दिल इंसान को भी रुला दें।
अपने आखिरी वॉइस मैसेज में विजय ने कहा:
"यहां बहुत गोलियां चल रही हैं... दोनों तरफ से फायरिंग हो रही है और मैं बीच में फंस गया हूं। मुझे नहीं लगता कि मैं अब जिंदा बच पाऊंगा... बच्चों का ख्याल रखना... शायद अब हमारी बात न हो पाए।"
यह संदेश भेजने के कुछ ही मिनटों बाद, एक गोली विजय को आ लगी और उन्होंने वहीं दम तोड़ दिया। वह अपने पीछे अपनी पत्नी और तीन मासूम बच्चों को छोड़ गए हैं, जिनका अब रो-रोकर बुरा हाल है।
3 साल पहले गए थे कमाने
परिवार वालों ने बताया कि विजय 3 साल पहले ही कर्ज लेकर सऊदी अरब में ड्राइवर की नौकरी करने गए थे। वह हर महीने पैसे भेजते थे, जिससे घर का खर्च चलता था और बच्चे पढ़ रहे थे। कुछ ही महीनों में उन्हें घर वापस लौटना था। उन्होंने बच्चों के लिए खिलौने और पत्नी के लिए साड़ी लाने का वादा किया था। लेकिन अब घर लौटेगा तो सिर्फ उनका बेजान शरीर।
सरकार से शव लाने की गुहार
यह घटना 27 अक्टूबर की बताई जा रही है, लेकिन परिवार को इसकी जानकारी दो दिन बाद मिली। अब यह गरीब और बेबस परिवार भारत सरकार और झारखंड सरकार से गुहार लगा रहा है कि उनके बेटे का शव जल्द से जल्द सऊदी अरब से भारत लाने की व्यवस्था की जाए, ताकि वे अपने लाडले का अंतिम संस्कार अपनी मिट्टी पर कर सकें।
बगोदर के विधायक विनोद कुमार सिंह और स्थानीय प्रशासन ने परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है और विदेश मंत्रालय से संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं। विजय की यह दर्दनाक कहानी उन लाखों भारतीय मजदूरों की कहानी है, जो अपने परिवार को एक बेहतर जिंदगी देने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर विदेशों में काम करते हैं।