पशुपालकों के लिए बड़ी खबर: अब पशुओं का भी बनेगा 'आधार'! डिजिटल पोर्टल पर दर्ज होगी हर जानकारी, बीमारियों पर लगेगा लगाम

Post

नई दिल्ली, ब्यूरो।देश के करोड़ों पशुपालकों और किसानों के लिए केंद्र सरकार ने एक क्रांतिकारी डिजिटल पहल की शुरुआत की है। अब इंसानों की तरह ही पशुओं का भी अपना डिजिटल डेटाबेस होगा। सरकार ने नेशनल डिजिटल लाइवस्टॉक मिशन (NDLM) पोर्टल लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य पशुधन क्षेत्र को आधुनिक और पारदर्शी बनाना है। इस नई व्यवस्था के तहत अब हर गाय, भैंस और अन्य पशुओं का पूरा 'कच्चा चिट्ठा' ऑनलाइन उपलब्ध होगा। इससे न केवल पशुओं की चोरी रुकेगी, बल्कि उनके स्वास्थ्य और टीकाकरण की रियल-टाइम मॉनिटरिंग भी संभव हो सकेगी।

NDLM पोर्टल: एक क्लिक पर मिलेगी पशु और पशुपालक की पूरी कुंडली

सरकार की इस योजना के तहत पशुपालन विभाग हर पशु और उसके मालिक का पूरा डेटा डिजिटल रूप में सुरक्षित करेगा। पोर्टल पर पशुपालक का नाम, मोबाइल नंबर और आधार विवरण के साथ-साथ पशु की नस्ल, उम्र, और टीकाकरण (Vaccination) का पूरा रिकॉर्ड दर्ज होगा। इस डिजिटल रिकॉर्ड का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पशु चिकित्सक किसी भी बीमारी की स्थिति में पशु की मेडिकल हिस्ट्री देखकर उसका सटीक इलाज कर सकेंगे।

पंचायत सचिव को मिली कमान: खरीद-बिक्री की देनी होगी जानकारी

गांवों में इस मिशन को जमीनी स्तर पर लागू करने की जिम्मेदारी पंचायत सचिव को सौंपी गई है। अब यदि कोई ग्रामीण नया पशु खरीदता है या अपने पशु को किसी दूसरे व्यक्ति को बेचता है, तो इसकी सूचना पंचायत सचिव को देनी अनिवार्य होगी। सचिव इस जानकारी को पोर्टल पर अपडेट करेंगे। इससे सरकार के पास गांव से लेकर जिला स्तर तक पशुधन की सटीक संख्या और उनकी स्थिति का डेटा उपलब्ध रहेगा।

ग्राम से लेकर जिला स्तर तक 'फिल्टर' होगा डेटा

डेटा की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने त्रि-स्तरीय निगरानी प्रणाली बनाई है:

ग्राम स्तर: पंचायत सचिव और फील्ड कर्मचारी जानकारी एकत्र करेंगे।

ब्लॉक स्तर: पशु चिकित्सक डेटा की तकनीकी जांच करेंगे कि टीकाकरण और स्वास्थ्य रिकॉर्ड सही है या नहीं।

जिला स्तर: निगरानी समितियां पूरे जिले के आंकड़ों का विश्लेषण करेंगी।

इस प्रक्रिया से फर्जीवाड़े की गुंजाइश खत्म होगी और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे असली पशुपालकों तक पहुँचेगा।

बीमारियों से सुरक्षा और बेहतर प्रबंधन का 'कवच'

पशुओं में फैलने वाली संक्रामक बीमारियों (जैसे लम्पी या खुरपका-मुंहपका) को रोकने में यह डिजिटल डेटाबेस 'गेम-चेंजर' साबित होगा। पोर्टल के जरिए यह पता लगाना आसान होगा कि किस क्षेत्र में पशुओं को टीका नहीं लगा है। बीमारी फैलने की स्थिति में सरकार प्रभावित क्षेत्रों की तुरंत पहचान कर वहां मेडिकल टीम भेज सकेगी। साथ ही, बेहतर प्रबंधन से पशुओं की दुग्ध उत्पादन क्षमता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

पशुपालकों को मिलेंगे कई बड़े फायदे

डिजिटल प्रणाली लागू होने से पशुपालकों को बार-बार कागजी कार्यवाही नहीं करनी पड़ेगी। पशुओं के बीमा (Insurance) से लेकर सरकारी सब्सिडी प्राप्त करने तक, हर काम ऑनलाइन डेटा के जरिए तेजी से होगा। इसके अलावा, जब पशुपालक अपना पशु बेचने जाएगा, तो पोर्टल पर मौजूद उसका स्वास्थ्य रिकॉर्ड उसकी सही कीमत दिलाने में मदद करेगा।