Jharkhand : कुदरत का कहर या हमारा लालच? पश्चिमी सिंहभूम में हाथी के हमले ने उजाड़ा हँसता-खेलता घर, दहशत में ग्रामीण
News India Live, Digital Desk: कहते हैं हाथी बहुत ही शांत स्वभाव का जानवर है, लेकिन जब उसे गुस्सा आता है या जब जंगलों में उसका घर सुरक्षित नहीं रहता, तो उसकी कीमत बेकसूर इंसानों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (West Singhbhum) जिले से एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे राज्य को गमगीन कर दिया है।
एक ही झटके में एक परिवार के तीन सदस्यों की मौत यह सोचना भी डरावना लगता है।
क्या हुआ उस खौफनाक मंजर के दौरान?
बीती रात पश्चिमी सिंहभूम के जंगली इलाके से सटे एक गांव में अचानक एक जंगली हाथी घुस आया। जब तक गांव वाले कुछ समझ पाते या संभल पाते, हाथी ने तबाही मचाना शुरू कर दिया। इस हमले का सबसे बुरा असर उस एक बदकिस्मत परिवार पर पड़ा, जो अपने घर में सो रहा था।
हाथी ने न केवल घर को ढहा दिया, बल्कि भागने की कोशिश कर रहे परिवार के तीन लोगों को बुरी तरह कुचल दिया। गाँव में चीख-पुकार मच गई, लेकिन उस बेकाबू जानवर के सामने किसी की हिम्मत नहीं हुई कि वह मदद के लिए आगे बढ़ सके। सुबह जब सूरज निकला, तो वहां सिर्फ मलबे के साथ बिखरे हुए सपनों के ढेर पड़े थे।
सिर्फ एक हादसा नहीं, एक बहुत बड़ा घाव है
एक ही घर के तीन चिरागों का बुझ जाना सिर्फ एक कानूनी रिकॉर्ड या 'मुआवजे' का विषय नहीं है। उस गांव के लिए यह एक बहुत बड़ा मानसिक सदमा है। ग्रामीण अब रात में सोने से डर रहे हैं। क्या मालूम कब कौन सा 'गजराज' जंगल से बाहर आ जाए और अगला निशाना कोई और परिवार बन जाए।
आखिर समाधान क्या है?
झारखंड के कई इलाकों में हाथी और इंसान के बीच का यह संघर्ष (Human-Elephant Conflict) कोई नई बात नहीं है। पर सवाल यह उठता है कि क्या केवल मशाल जलाकर या ढोल पीटकर हाथियों को डराना काफी है? वन विभाग की पेट्रोलिंग और अर्ली वॉर्निंग सिस्टम आखिर कब दुरुस्त होंगे? जब भी ऐसी कोई घटना होती है, प्रशासन मुआवजे का मरहम लगा देता है, लेकिन क्या वो मुआवजा उस मां, उस बाप या उस बच्चे को वापस ला सकता है जिसने अपनों को खो दिया?
हमारी जिम्मेदारी
यह सोचने का वक्त है कि जंगलों का कटाव और जानवरों के गलियारों में बढ़ती इंसानी दखलअंदाजी ही इन हमलों की असली जड़ है। अगर हम उनकी जगह छीनेंगे, तो वे हमारी गलियों में जरूर आएंगे।
इस हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के लिए पूरा इलाका आंसू बहा रहा है। हम उम्मीद करते हैं कि प्रशासन अब केवल बातों तक सीमित न रहकर ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए कोई पुख्ता कदम उठाएगा।
इस घटना के बारे में आप क्या सोचते हैं? क्या हाथियों के हमले के लिए पूरी तरह उन्हें जिम्मेदार ठहराना सही है? अपनी राय हमें जरूर बताएं।