Jharkhand Municipal Election : पार्षद या मेयर बनना है तो जान लें ये जरूरी नियम, एक छोटी सी चूक और नामांकन हो जाएगा रद्द

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News India Live, Digital Desk: झारखंड में स्थानीय सरकार का हिस्सा बनने का सपना देख रहे संभावित उम्मीदवारों के लिए बिगुल बज चुका है। यदि आप भी नगर निकाय चुनाव में ताल ठोकने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए सबसे जरूरी है। चुनावी मैदान में उतरने से पहले आपको अपनी योग्यता (Eligibility) और दस्तावेजों की बारीकियों को समझना होगा, क्योंकि नामांकन के दौरान होने वाली एक मामूली तकनीकी गलती आपकी सारी मेहनत पर पानी फेर सकती है।

निर्वाचन आयोग के स्पष्ट निर्देश हैं कि समय रहते सभी अर्हताओं को जांच लें ताकि नामांकन पत्र खारिज न हो।

उम्मीदवार बनने की पहली शर्त: उम्र और वोटर लिस्ट का गणित

निकाय चुनाव में हर पद के लिए अलग-अलग मानक तय किए गए हैं। यदि आप वार्ड पार्षद या सदस्य पद के लिए चुनाव लड़ना चाहते हैं, तो आपकी न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिए। वहीं, शहर के प्रथम नागरिक यानी महापौर (मेयर) या अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार की उम्र कम से कम 30 वर्ष होना अनिवार्य है।

इसके साथ ही, प्रत्याशी का नाम संबंधित नगरपालिका क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज होना अनिवार्य है। यदि आपके नाम का उल्लेख वोटर लिस्ट में नहीं है, तो आप नामांकन दाखिल नहीं कर पाएंगे।

बकाया टैक्स वालों की बढ़ेगी मुश्किल

चुनाव लड़ने की योजना बना रहे लोगों को अपना 'नो ड्यूज' सर्टिफिकेट तैयार रखना होगा। नियम के अनुसार, निर्वाचन वर्ष से ठीक पहले वाले वित्तीय वर्ष के अंत तक नगरपालिका के सभी बकाया करों (Taxes) का भुगतान करना जरूरी है। यदि आप पर कोई टैक्स बकाया है, तो नामांकन के समय आपकी उम्मीदवारी खतरे में पड़ सकती है।

दो से अधिक संतान होने पर क्या है कानून?

झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 के तहत संतानों की संख्या को लेकर कड़ा रुख अपनाया गया है। सामान्य नियम यह है कि चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी की दो से अधिक जीवित संतानें नहीं होनी चाहिए। हालांकि, इसमें एक विशेष छूट दी गई है। यदि अधिनियम लागू होने के एक साल के भीतर (9 फरवरी 2013 तक) किसी व्यक्ति की दो से अधिक संतानें थीं, तो उसे अयोग्य नहीं माना जाएगा। लेकिन इस कट-ऑफ तारीख के बाद तीसरे बच्चे वाले उम्मीदवार अयोग्य घोषित किए जा सकते हैं।

प्रस्तावक और समर्थक: वार्ड का होना क्यों है जरूरी?

नामांकन प्रक्रिया में प्रस्तावक और समर्थक की भूमिका सबसे अहम होती है।

पार्षद पद के लिए: प्रस्तावक और समर्थक दोनों का उसी वार्ड का मतदाता होना अनिवार्य है, जहाँ से उम्मीदवार खड़ा हो रहा है।

मेयर/अध्यक्ष पद के लिए: इनके प्रस्तावक और समर्थक नगरपालिका क्षेत्र के किसी भी वार्ड के निवासी हो सकते हैं।

सावधानी: जो व्यक्ति स्वयं मतदाता के रूप में अयोग्य है, वह किसी भी प्रत्याशी का प्रस्तावक या समर्थक नहीं बन सकता।

नामांकन शुल्क: आरक्षित वर्ग को मिलेगी 50% की छूट

चुनाव आयोग ने नामांकन फीस को लेकर भी राहत दी है। अनुसूचित जाति (SC), जनजाति (ST) और पिछड़ा वर्ग (OBC) के उम्मीदवारों को कुल नामांकन शुल्क का केवल आधा (50%) ही भुगतान करना होगा। रोचक बात यह है कि यदि आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार किसी अनारक्षित (General) सीट से भी चुनाव लड़ता है, तब भी उसे आधा शुल्क ही देना होगा।

यदि कोई उम्मीदवार एक ही पद के लिए एक से अधिक नामांकन सेट दाखिल करता है, तो उसे फीस एक बार ही देनी होगी। लेकिन, यदि कोई व्यक्ति अलग-अलग पदों (जैसे पार्षद और मेयर दोनों) के लिए चुनाव लड़ता है, तो उसे हर पद के लिए अलग-अलग शुल्क जमा करना होगा।