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March 12 2026 05:49 pm

झारखंड में ED बनाम पुलिस रांची ED ऑफिस में मारपीट मामले की होगी CBI जांच, हाई कोर्ट का कड़ा फैसला

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News India Live, Digital Desk: झारखंड की राजधानी रांची से एक बेहद महत्वपूर्ण और प्रभावकारी कानूनी खबर सामने आई है। झारखंड हाई कोर्ट ने रांची स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ED) के क्षेत्रीय कार्यालय के भीतर हुई मारपीट और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक विवादित मामले की जांच CBI (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) को सौंपने का आदेश दिया है।

11 मार्च 2026 की इस बड़ी खबर ने राज्य की प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर दो बड़ी जांच एजेंसियों और पुलिस की कार्यप्रणाली से जुड़ा है।

क्या है पूरा विवाद? (Case Background)

ED दफ्तर के भीतर हंगामा: यह मामला तब शुरू हुआ जब ED एक मनी लॉन्ड्रिंग केस की जांच कर रही थी। आरोप है कि पूछताछ के दौरान या उसके आसपास ED के रांची दफ्तर के भीतर मारपीट और गंभीर दुर्व्यवहार की घटना हुई थी।

पुलिस और ED के बीच टकराव: इस घटना के बाद स्थानीय पुलिस और ED के बीच कानूनी खींचतान शुरू हो गई थी। ED का आरोप था कि स्थानीय पुलिस और कुछ रसूखदार लोग जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं और अधिकारियों के साथ बदसलूकी की गई है।

हाई कोर्ट का हस्तक्षेप: मामले की गंभीरता और इसकी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता को देखते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। कोर्ट ने माना कि चूंकि मामले में उच्च पदों पर बैठे लोग और केंद्रीय एजेंसियां शामिल हैं, इसलिए राज्य पुलिस की जांच पर सवाल उठ सकते हैं।

हाई कोर्ट के फैसले की 3 बड़ी बातें

निष्पक्षता की जरूरत: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एक स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी (CBI) द्वारा जांच जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और किसी भी प्रकार के पक्षपात की गुंजाइश न रहे।

मनी लॉन्ड्रिंग लिंक: मारपीट की इस घटना के तार मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले से जुड़े बताए जा रहे हैं, जिसकी जांच ED पहले से कर रही है। अब CBI इस बात की तह तक जाएगी कि क्या मारपीट जांच को दबाने के इरादे से की गई थी।

प्रशासनिक जवाबदेही: हाई कोर्ट का यह आदेश झारखंड सरकार और राज्य पुलिस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि कोर्ट ने उनकी अब तक की कार्रवाई को पर्याप्त नहीं माना।

आगे क्या होगा?

अब CBI जल्द ही इस मामले में नई FIR दर्ज कर सकती है और ED के उन अधिकारियों व संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज करेगी जो उस दिन दफ्तर में मौजूद थे। इस जांच से कई रसूखदार चेहरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।