BIT Mesra Case : सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला मृतक छात्र के परिवार को ₹20 लाख मुआवजा दे संस्थान

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News India Live, Digital Desk: झारखंड के प्रतिष्ठित संस्थान BIT Mesra (बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) और एक पीड़ित परिवार के बीच चल रही लंबी कानूनी लड़ाई का अंत हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने संस्थान को आदेश दिया है कि वह अपने एक मृतक छात्र के परिवार को ₹20 लाख का मुआवजा प्रदान करे।

11 मार्च 2026 को आए इस ऐतिहासिक फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि अपने छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।

क्या था पूरा मामला? (The 15-Year Legal Battle)

दुखद हादसा: यह मामला लगभग 15 साल पुराना है, जब BIT Mesra के एक छात्र की संस्थान के परिसर या उससे जुड़ी गतिविधियों के दौरान असामयिक मृत्यु हो गई थी।

संस्थान की लापरवाही का आरोप: परिवार का आरोप था कि छात्र की मौत संस्थान प्रबंधन की लापरवाही और सुरक्षा मानकों में कमी के कारण हुई। परिवार ने मुआवजे के लिए निचली अदालतों और फिर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक: इससे पहले हाई कोर्ट ने भी छात्र के पक्ष में फैसला सुनाया था, जिसे BIT Mesra ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। संस्थान का तर्क था कि वे इस घटना के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी और फैसला

संस्थान की जिम्मेदारी: सुप्रीम कोर्ट ने संस्थान की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि जब कोई छात्र किसी संस्थान में प्रवेश लेता है, तो उसकी सुरक्षा और कल्याण की जिम्मेदारी प्रबंधन की होती है।

मुआवजे की राशि: अदालत ने आदेश दिया कि संस्थान पीड़ित परिवार को ₹20 लाख का भुगतान करे। यह राशि छात्र के भविष्य के नुकसान और परिवार को हुए मानसिक आघात की भरपाई के रूप में तय की गई है।

ब्याज सहित भुगतान: कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि भुगतान में देरी होती है, तो संस्थान को इस राशि पर निर्धारित ब्याज भी देना होगा।

शिक्षण संस्थानों के लिए एक बड़ा संदेश

यह फैसला देश भर के इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेजों के लिए एक नजीर (Precedent) बनेगा। अब संस्थानों को अपने कैंपस, हॉस्टल और लैब में सुरक्षा इंतजामों को लेकर अधिक सतर्क रहना होगा, क्योंकि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में उनकी जवाबदेही तय की जाएगी।