Jharkhand Alert: बजट सत्र से पहले झारखंड में बड़ी आतंकी साजिश? मंत्रियों और विधायकों पर हमले का इनपुट, पुलिस ने जारी किया रेड अलर्ट

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News India Live, Digital Desk: झारखंड विधानसभा के आगामी बजट सत्र से पहले राज्य की राजनीति और सुरक्षा गलियारों में हड़कंप मच गया है। पुलिस मुख्यालय को मिले ताजा खुफिया इनपुट (Intelligence Input) के अनुसार, माओवादी और प्रतिबंधित नक्सली संगठन सत्र के दौरान मंत्रियों और विधायकों को अपना निशाना बना सकते हैं। इस गंभीर खतरे को देखते हुए मुख्यालय ने सभी जिलों के एसपी (SP) को चौबीसों घंटे सतर्क रहने का आदेश जारी किया है।

1. बजट सत्र के दौरान 'घात' लगाने की तैयारी

झारखंड विधानसभा का बजट सत्र 18 फरवरी से शुरू होने वाला है। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, नक्सली इस दौरान सक्रिय हो सकते हैं:

सफर के दौरान खतरा: इनपुट में स्पष्ट किया गया है कि जब विधायक और मंत्री अपने गृह क्षेत्रों से राजधानी रांची के लिए निकलेंगे, उस दौरान उन पर हमला किया जा सकता है।

नक्सली बंद का साया: नक्सलियों ने 17 फरवरी को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है, जिसे पुलिस इस साजिश का हिस्सा मान रही है।

2. इन 7 'डेथ वैली' (घाटियों) पर पुलिस की पैनी नजर

नक्सलियों के इतिहास और भौगोलिक स्थिति को देखते हुए पुलिस ने कुछ रास्तों को 'अति-संवेदनशील' घोषित किया है। इन मार्गों पर यात्रा करने वाले जनप्रतिनिधियों को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है:

तैमारा घाटी: रांची-बुंडू मार्ग।

चुटुपालू और चरही: रामगढ़-हजारीबाग मार्ग।

तिलैया और टाटीझरिया: हजारीबाग के दुर्गम रास्ते।

आमझरिया: लातेहार-पलामू मार्ग।

बंदगांव घाटी: खूंटी-चाईबासा मार्ग।

कोलेबिरा: गुमला-सिमडेगा मार्ग।

कुरुमगढ़: गुमला के जंगली इलाके।

3. पुलिस मुख्यालय के कड़े निर्देश (SOP जारी)

आईजी (अभियान) ने सभी जिला कप्तानों को सख्त प्रोटोकॉल का पालन करने का निर्देश दिया है:

रोड ओपनिंग पार्टी (ROP): महत्वपूर्ण मार्गों पर गश्त तेज कर दी गई है।

पायलट सुरक्षा: मंत्रियों के काफिले के साथ चलने वाली सुरक्षा टीम को और अधिक सतर्क रहने को कहा गया है।

LRP अभियान: जंगली इलाकों से सटे रास्तों पर 'लॉन्ग रेंज पेट्रोलिंग' शुरू कर दी गई है।

4. 2026 तक 'नक्सल मुक्त' झारखंड का लक्ष्य

यह अलर्ट ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार और सुरक्षा बल मार्च 2026 तक झारखंड को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाने के मिशन पर काम कर रहे हैं। हाल के दिनों में कई बड़े नक्सलियों की गिरफ्तारी और सरेंडर से हताश संगठन अब राजनेताओं जैसे 'सॉफ्ट टारगेट' की तलाश में हैं।