Jharkhand Alert : मिडिल ईस्ट संकट के बीच सीएम हेमंत सोरेन का बड़ा कदम पीएम मोदी से लगाई गुहार और जारी किया इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर

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News India Live, Digital Desk: दुनिया के कुछ हिस्सों, विशेषकर मिडिल ईस्ट (Middle East) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध जैसे हालातों ने झारखंड सरकार की चिंता बढ़ा दी है।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विदेशों में फंसे झारखंड के प्रवासियों की सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की अपील की है। इसके साथ ही, राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों की मदद के लिए तत्काल प्रभाव से एक इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर भी जारी कर दिया है।

1. सीएम हेमंत सोरेन की पीएम मोदी से अपील (Appeal to PM Modi)

झारखंड के बड़ी संख्या में लोग मिडिल ईस्ट के देशों में रोजगार के लिए रहते हैं। एयरस्पेस बंद होने और उड़ानें रद्द होने की खबरों के बीच सीएम सोरेन ने केंद्र सरकार से सक्रिय भूमिका निभाने का अनुरोध किया है।

सुरक्षित वापसी: मुख्यमंत्री ने मांग की है कि केंद्र सरकार विदेश मंत्रालय के माध्यम से झारखंडी प्रवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और जरूरत पड़ने पर उन्हें एयरलिफ्ट (Airlift) करने की व्यवस्था करे।

डेटा संकलन: राज्य सरकार केंद्र के साथ मिलकर उन लोगों का डेटा साझा कर रही है जो वर्तमान में संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद हैं।

2. झारखंड सरकार ने जारी किया इमरजेंसी नंबर (Emergency Helpline)

झारखंड के जो निवासी विदेश में फंसे हैं या जिनके परिजन यहाँ परेशान हैं, उनके लिए राज्य कंट्रोल रूम ने विशेष नंबर जारी किए हैं:

हेल्पलाइन नंबर: सरकार ने 0651-2490037 और 0651-2490052 जैसे नंबर सक्रिय किए हैं।

व्हाट्सएप सपोर्ट: इसके अलावा प्रवासियों की लोकेशन और जानकारी साझा करने के लिए एक व्हाट्सएप नंबर भी जारी किया गया है, ताकि रियल-टाइम अपडेट मिल सके।

3. 'झारखंड राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष' हुआ अलर्ट (State Control Room)

झारखंड राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष (Jharkhand State Migrant Control Room) को 24/7 मोड पर रखा गया है।

परिजनों को ढांढस: नियंत्रण कक्ष के अधिकारी लगातार उन परिवारों के संपर्क में हैं जिनके सदस्य मिडिल ईस्ट में हैं।

पंजीकरण: सरकार ने उन सभी प्रवासियों से अपना पंजीकरण कराने की अपील की है जो हाल ही में काम के सिलसिले में विदेश गए हैं।

4. मिडिल ईस्ट संकट और झारखंडी मजदूर

झारखंड के गिरिडीह, हजारीबाग और गढ़वा जैसे जिलों से हजारों कुशल और अकुशल मजदूर सऊदी अरब, कतर और ओमान जैसे देशों में काम करते हैं।

रोजगार पर संकट: युद्ध के हालातों की वजह से न केवल उनकी जान को खतरा है, बल्कि उनके रोजगार और भविष्य की कमाई पर भी अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।

सरकारी भरोसा: हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर कहा है कि, "संकट की इस घड़ी में झारखंड सरकार अपने हर नागरिक के साथ खड़ी है। हम उनकी सुरक्षित घर वापसी के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।"

5. एयरस्पेस क्लोजर का असर (Impact of Airspace Closure)

अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के रद्द होने से कई लोग एयरपोर्ट्स पर फंसे हुए हैं। झारखंड सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी प्रवासी को आर्थिक मदद या कानूनी सहायता की जरूरत पड़ती है, तो राज्य सरकार उसका वहन करेगी।