जापान ने मारी बाज़ी, डॉलर की दादागिरी... हरे निशान में लौटे एशियाई बाज़ार

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आज हफ़्ते के पहले दिन शेयर बाज़ार में पैसा लगाने वालों के चेहरे खिल उठे हैं. एशिया के ज़्यादातर बाज़ारों में आज ज़बरदस्त तेज़ी देखने को मिल रही है, और इस पूरी कहानी का हीरो बना है जापान. साथ ही, अमेरिकी डॉलर की लगातार बढ़ती ताक़त ने भी बाज़ार के सेंटिमेंट को मज़बूत किया है.

कहानी का हीरो: जापान का 'निक्केई'

आज सुबह जैसे ही बाज़ार खुले, जापान के मुख्य शेयर बाज़ार इंडेक्स, निक्केई (Nikkei), ने रॉकेट की रफ़्तार पकड़ ली और शानदार बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा. जापान के बाज़ार में इस उछाल के पीछे एक बहुत ही सीधी-सी वजह है - डॉलर के मुक़ाबले जापानी करेंसी 'येन' का लगातार कमज़ोर होना.

अब आप सोचेंगे कि अपनी करेंसी के कमज़ोर होने पर कोई देश ख़ुश कैसे हो सकता है?

दरअसल, जब येन कमज़ोर होता है, तो टोयोटा (Toyota), सोनी (Sony) और होंडा (Honda) जैसी बड़ी जापानी कंपनियों को अपना सामान विदेशों में बेचने में ज़बरदस्त फ़ायदा होता है. इससे उनकी कमाई बढ़ती है, और जब कंपनियों की कमाई बढ़ती है, तो उनके शेयर भी भागते हैं. बस, इसी फ़ायदे ने आज जापान के पूरे शेयर बाज़ार को हरा कर दिया.

दूसरे बाज़ारों पर भी दिखा असर

जापान की इस तेज़ी का असर दूसरे एशियाई बाज़ारों पर भी साफ़ देखने को मिला. जापान के बाहर के एशियाई बाज़ारों का हाल बताने वाला MSCI इंडेक्स भी बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था. ऑस्ट्रेलिया से लेकर हॉन्ग कॉन्ग तक के बाज़ार हरे निशान में थे, जो निवेशकों के लिए एक राहत की ख़बर थी.

डॉलर की मज़बूती और निवेशकों की नज़रें

बाज़ार की इस ख़ुशी के पीछे एक और बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर की लगातार मज़बूती है. इस समय दुनिया भर के बड़े निवेशक अमेरिका के सेंट्रल बैंक यानी फेडरल रिज़र्व के अगले क़दम का इंतज़ार कर रहे हैं. यह देखा जा रहा है कि क्या अमेरिका ब्याज़ दरें बढ़ाएगा या उन्हें घटाने का कोई संकेत देगा. जब तक यह साफ़ नहीं हो जाता, तब तक ज़्यादातर निवेशक डॉलर को ही सबसे सुरक्षित मान रहे हैं.

कुल मिलाकर, आज का दिन निवेशकों के लिए मुस्कुराहट लेकर आया है, जिसका सेहरा जापान की शानदार परफॉरमेंस और डॉलर की मज़बूती के सिर बंधा है.