Jamshedpur Illegal Construction : झारखंड हाईकोर्ट का सख्त रुख,9 मार्च तक ध्वस्त करें बिल्डिंग्स, याचिका डालने वालों को फटकार
News India Live, Digital Desk : झारखंड हाईकोर्ट ने जमशेदपुर में अवैध निर्माण (Illegal Construction) के खिलाफ अपना कड़ा रुख बरकरार रखा है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने बुधवार को अवैध निर्माण को बचाने के लिए दायर की गई दर्जनों याचिकाओं को न केवल खारिज कर दिया, बल्कि निर्माणकर्ताओं को कड़ी फटकार भी लगाई।
अदालत ने जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (JNAC) को 'डेडलाइन' देते हुए आदेश दिया है कि 9 मार्च 2026 तक सभी चिह्नित 24 अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर शपथ पत्र दाखिल करें।
“ईमानदार लोगों का जीवन बर्बाद कर दिया” कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने अवैध निर्माण करने वालों और उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर तीखे सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा:
जुर्माने की चेतावनी: अब अगर कोई अवैध निर्माण बचाने के लिए कोर्ट आता है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
मौलिक अधिकारों का हनन: अवैध निर्माण की वजह से पड़ोसी को न धूप मिल रही है और न हवा। यह कानून का पालन करने वाले नागरिकों के जीवन के साथ खिलवाड़ है।
कोई दस्तावेज नहीं: याचिकाकर्ताओं में से कोई भी ऐसा कागज पेश नहीं कर सका जिससे साबित हो कि निर्माण नक्शे के अनुसार हुआ है।
JNAC की 'सांठगांठ' और अफसरों की जिम्मेदारी
हाईकोर्ट ने इस मामले में सरकारी तंत्र की मिलीभगत पर भी उंगली उठाई है।
JNAC पर आरोप: कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि शहर में इतने बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति की सांठगांठ (Nexus) के बिना संभव नहीं थे।
अफसरों पर गाज: अदालत ने नगर विकास सचिव, उपायुक्त (DC) और एसएसपी (SSP) को निर्देश दिया है कि वे ध्वस्तीकरण अभियान में JNAC को पूरा सहयोग दें। यदि आदेश के पालन में कमी पाई गई, तो ये अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
तीन वकीलों की कमेटी ने खोली पोल
झारखंड हाईकोर्ट द्वारा गठित तीन अधिवक्ताओं की जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे किए थे:
भवन उपनियमों का उल्लंघन: निजी बिल्डरों और भू-मालिकों ने बिल्डिंग बायलॉज (Building Bylaws) का सरेआम उल्लंघन किया है।
निगरानी का अभाव: संबंधित अधिकारियों ने निर्माण के समय कोई प्रभावी मॉनिटरिंग नहीं की, जिससे अवैध इमारतों का जाल फैल गया।
एकमात्र विकल्प: कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा कि शहर की व्यवस्था सुधारने के लिए इन अवैध निर्माणों को तोड़ना ही एकमात्र विकल्प है।
अगली सुनवाई: 9 मार्च 2026
कोर्ट ने जेएनएसी को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी कर अगली सुनवाई (9 मार्च) को रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। इस आदेश के बाद जमशेदपुर के अवैध निर्माणकर्ताओं और बिल्डरों में हड़कंप मच गया है।यह याचिका राकेश कुमार झा की ओर से दाखिल की गई थी, जिसमें अधिवक्ताओं की कमेटी की रिपोर्ट को आधार बनाया गया है।