Jaipur Weather : गुलाबी नगरी में मौसम का सरप्राइज सुबह-सुबह झमाझम बारिश से ठंडी हुई राजधानी, IMD ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट
News India Live, Digital Desk: राजस्थान की राजधानी जयपुर में सोमवार की सुबह किसी मानसून की सुबह जैसी नजर आई। सुबह करीब 6 बजे से ही आसमान में काली घटाएं छा गईं और देखते ही देखते तेज गर्जना के साथ झमाझम बारिश शुरू हो गई। इस अचानक हुए बदलाव से जयपुरवासियों को मार्च के महीने में ही 'सावन' जैसा अहसास होने लगा। ठंडी हवाओं के चलने से तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे पिछले कुछ दिनों से पड़ रही तेज गर्मी से बड़ी राहत मिली है। मौसम विभाग (IMD) ने स्थिति को देखते हुए जयपुर सहित आसपास के जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट (Orange Alert) जारी किया है।
आज के मौसम का हाल: क्यों हुई अचानक बारिश?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर भारत में सक्रिय हुए एक नए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कारण यह बदलाव देखने को मिल रहा है:
सुबह का नजारा: शहर के वैशाली नगर, मानसरोवर, सी-स्कीम और मालवीय नगर जैसे इलाकों में मध्यम से तेज बारिश हुई। कई जगहों पर जलभराव के कारण सुबह के समय ट्रैफिक की रफ्तार भी कुछ धीमी रही।
तापमान में गिरावट: बारिश और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली ठंडी हवाओं के कारण पारा 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया है।
अलर्ट की स्थिति: IMD ने चेतावनी दी है कि अगले 2-3 घंटों के दौरान जयपुर के अलावा अलवर, भरतपुर, दौसा और झुंझुनू में भी बिजली गिरने (Thunderstorm) और तेज आंधी के साथ बारिश जारी रह सकती है।
आगामी दिनों का पूर्वानुमान: अभी और बदलेगा मिजाज
जयपुर मौसम केंद्र के अनुसार, यह तो बस शुरुआत है। आने वाले दिनों में बैक-टू-बैक दो पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने वाले हैं:
26-27 मार्च: एक बार फिर पूर्वी और उत्तरी राजस्थान में बादलों की आवाजाही बढ़ेगी और हल्की बारिश की संभावना है।
28 से 31 मार्च: महीने के अंत में एक और मजबूत पश्चिमी विक्षोभ दस्तक देगा। इस दौरान राज्य के आधे से ज्यादा हिस्सों में तेज आंधी, बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि (Hailstorm) का भी अनुमान है।
किसानों के लिए सलाह: 'राहत भी और आफत भी'
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह बारिश जहां आम जनता के लिए गर्मी से राहत लेकर आई है, वहीं उन किसानों के लिए चिंता का सबब बन सकती है जिनकी गेहूं और चने की फसल कटाई के लिए तैयार है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे कटी हुई फसल को तिरपाल से ढंककर सुरक्षित रखें और बिजली कड़कने के समय पेड़ों के नीचे शरण न लें।