सचिन पायलट का वो इंतज़ार क्या अब खत्म होने वाला है? राजस्थान कांग्रेस के इस बड़े बदलाव के पीछे की पूरी कहानी

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News India Live, Digital Desk : राजस्थान की राजनीति में अगर कोई एक सवाल है जो पिछले कई सालों से हवा में तैर रहा है, तो वो है सचिन पायलट का अगला कदम क्या होगा?"। पिछले कुछ दिनों से जयपुर से लेकर दिल्ली तक, सियासी गलियारों में एक ही चर्चा है कि क्या अब वाकई सचिन पायलट को राजस्थान कांग्रेस की कमान पूरी तरह सौंप दी जाएगी?

कहा जा रहा है कि पायलट न केवल राजस्थान में कांग्रेस का अगला मुख्यमंत्री चेहरा (CM Face) होंगे, बल्कि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष (Party President) की जिम्मेदारी भी फिर से मिल सकती है। अब सवाल ये उठता है कि अचानक ऐसी अटकलें फिर से क्यों शुरू हो गई हैं? चलिए, इसे थोड़ा आसान भाषा में समझने की कोशिश करते हैं।

युवाओं की पसंद और ज़मीनी पकड़

हकीकत तो ये है कि राजस्थान में युवाओं का एक बड़ा तबका आज भी सचिन पायलट को अपने 'आइकन' के तौर पर देखता है। 2026 की दहलीज़ पर खड़े राजस्थान में कांग्रेस ये अच्छे से जानती है कि अगर राज्य में फिर से वापसी करनी है, तो नई ऊर्जा की जरूरत है। सचिन पायलट के पास वो जोश और 'कनेक्ट' है जो वोटरों को पार्टी की तरफ खींच सकता है। इसी वजह से पायलट समर्थकों के बीच ये उम्मीद फिर से जाग गई है।

क्या 'आलाकमान' ने मन बना लिया है?

चर्चा ये भी है कि कांग्रेस हाईकमान इस बार किसी भी तरह के 'अंतर्कलह' को मौका नहीं देना चाहता। पुराने और नए चेहरों के बीच की खींचतान ने पहले ही पार्टी का काफी नुकसान किया है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो आलाकमान अब सचिन पायलट की 'खामोशी' और उनकी 'मेहनत' को इनाम देने के मूड में है। पायलट जिस तरह से जिलों का दौरा कर रहे हैं और लोगों से मिल रहे हैं, वो साफ़ इशारा है कि उनकी नजर बड़े लक्ष्य पर है।

गहलोत गुट और शक्ति संतुलन (The Gehlot Factor)

राजस्थान की राजनीति बिना अशोक गहलोत के नाम के अधूरी है। उनकी जादुई राजनीति और मैनेजमेंट हमेशा भारी पड़ता रहा है। लेकिन अब सवाल भविष्य का है। क्या गहलोत कैंप सचिन पायलट को कमान सौंपने के इस संभावित फैसले का स्वागत करेगा? यह राजस्थान कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी। राजनीति में कहा जाता है कि यहाँ कोई स्थायी दुश्मन नहीं होता, बस समीकरण सही होने चाहिए।

असली चुनौती क्या है?

सचिन पायलट के सामने चुनौती सिर्फ पार्टी अध्यक्ष या चेहरा बनने की नहीं है, बल्कि गुटबाजी को खत्म करके पूरी कांग्रेस को एक छत के नीचे लाने की है। राजस्थान की जनता विकास और स्थिरता चाहती है। ऐसे में अगर पायलट को बागडोर मिलती है, तो उन्हें साबित करना होगा कि वो सबको साथ लेकर चल सकते हैं।

फिलहाल, इन अटकलों ने कार्यकर्ताओं में एक नई जान फूँक दी है। लोग चाय की थड़ियों पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या 'महाराज' की कुर्सी की जगह अब 'पायलट' के हाथ में विमान की कमान होगी?

ये तो वक्त ही बताएगा, पर एक बात तय है राजस्थान कांग्रेस में अंदर ही अंदर कुछ बड़ा पक रहा है, और इसका केंद्र सचिन पायलट ही हैं।