देवउठनी एकादशी पर तुलसी की मंजरी तोड़ना सही या गलत? कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये बड़ी भूल

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News India Live, Digital Desk : देवउठनी एकादशी का दिन हिंदू धर्म में बहुत ही पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दिन भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा से जागते हैं और सभी मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। इस दिन भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप का विवाह तुलसी जी के साथ कराया जाता है, इसलिए इसे 'तुलसी विवाह' के नाम से भी जानते हैं।

तुलसी जी को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है और उनकी पूजा का इस दिन विशेष विधान है। लेकिन तुलसी पूजा से जुड़े कई ऐसे नियम हैं जिनकी जानकारी होना बहुत जरूरी है। इन्हीं में से एक बड़ा सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि क्या देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी की मंजरी (तुलसी के बीज) तोड़नी चाहिए या नहीं?

क्या है तुलसी की मंजरी का महत्व?

सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि तुलसी की मंजरी बहुत ही शुभ और पवित्र होती है। इसे 'तुलसी का शीश' भी कहा जाता है। जब तुलसी का पौधा बहुत अच्छी तरह से बढ़ रहा होता है, तब उस पर मंजरी आती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी पर मंजरी आना इस बात का संकेत है कि तुलसी जी बहुत प्रसन्न हैं। लेकिन यह भी माना जाता है कि पौधे पर मंजरी को ज्यादा समय तक लगे नहीं रहने देना चाहिए, क्योंकि इससे तुलसी जी पर भार बढ़ता है और वे दुखी होती हैं, जिससे पौधा सूखने लगता है।

देवउठनी एकादशी पर मंजरी तोड़ें या नहीं?

अब आते हैं मुख्य सवाल पर। शास्त्रों के अनुसार, देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते या मंजरी को भूलकर भी नहीं तोड़ना चाहिए।

इसके पीछे कई धार्मिक कारण हैं:

  1. माता तुलसी का व्रत: ऐसी मान्यता है कि देवउठनी एकादशी के दिन माता तुलसी भी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस दिन उनका विवाह होता है। ऐसे में उनके किसी भी अंग, चाहे वो पत्ता हो या मंजरी, को तोड़ना उन्हें कष्ट पहुंचाने जैसा होता है।
  2. ऊर्जा का क्षरण: एकादशी के दिन तुलसी के पौधे को छूने, हिलाने या तोड़ने से उसकी सात्विक ऊर्जा कम होती है। इस दिन उन्हें स्पर्श करने की भी मनाही होती है।
  3. माता लक्ष्मी की नाराजगी: तुलसी जी को माता लक्ष्मी का ही स्वरूप माना गया है। एकादशी, खासकर देवउठनी एकादशी के दिन, उन्हें किसी भी तरह का कष्ट देने से माता लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं, जिससे घर की सुख-समृद्धि पर बुरा असर पड़ सकता है।

क्या करें अगर मंजरी तोड़ना जरूरी हो?

अगर आपके तुलसी के पौधे पर बहुत ज्यादा मंजरी आ गई है और उन्हें हटाना जरूरी है, तो इसके लिए सबसे अच्छा तरीका है कि आप एकादशी से एक या दो दिन पहले, यानी नवमी या दशमी तिथि को ही मंजरी तोड़ लें। अगर आप ऐसा करना भूल गए हैं, तो फिर द्वादशी तिथि (एकादशी के अगले दिन) को व्रत का पारण करने के बाद मंजरी तोड़ सकते हैं।

तोड़ी हुई मंजरी का क्या करें?

  • भगवान विष्णु को अर्पित करें: तोड़ी हुई मंजरी को फेंकना नहीं चाहिए। इसे शालिग्राम जी या भगवान विष्णु की तस्वीर पर अर्पित करें।
  • धन वृद्धि के लिए उपाय: कुछ सूखी मंजरी को एक लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रख दें। ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।
  • नए पौधे उगाएं: मंजरी के बीजों को सुखाकर आप उनसे नए तुलसी के पौधे भी उगा सकते हैं।

इसलिए, देवउठनी एकादशी के दिन पूरी श्रद्धा से तुलसी जी की पूजा करें, उनका विवाह रचाएं, लेकिन उन्हें तोड़ने की गलती बिल्कुल न करें।

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