इस्लामिक नाटो क्या भारत के खिलाफ बन रहा है कोई खतरनाक प्लान? जानिए पर्दे के पीछे का सच
News India Live, Digital Desk: पिछले कुछ दिनों से जिओ-पॉलिटिक्स (भू-राजनीति) की दुनिया में एक शब्द खूब चर्चा में है "इस्लामिक नाटो" (Islamic NATO)। सुनने में यह शब्द थोड़ा भारी लगता है, लेकिन इसका सीधा मतलब है मुस्लिम देशों का एक ऐसा साझा सैन्य गठबंधन, जैसा अमेरिका और यूरोप का 'नाटो' है।
खबर यह है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की मिलकर कुछ खिचड़ी पका रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान इस मुहिम को लीड करना चाहता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सच में मुमकिन है या पाकिस्तान सिर्फ़ अपनी जनता को खुश करने के लिए हवाई किले बना रहा है? चलिए, इसे बहुत ही आसान भाषा में समझते हैं।
पाकिस्तान आखिर चाहता क्या है?
हम सब जानते हैं कि पाकिस्तान की आर्थिक हालत कैसी है। जेब खाली है, लेकिन सपने बड़े हैं। पाकिस्तान की एक ही रट है— उसके पास 'परमाणु बम' (Nuclear Power) है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान मुस्लिम देशों, खासकर सऊदी अरब और तुर्की को यह समझाने की कोशिश कर रहा है कि, "देखो, मेरे पास न्यूक्लियर ताकत है, तुर्की के पास आधुनिक ड्रोन और तकनीक है, और सऊदी के पास पैसा है। अगर हम तीनों मिल जाएं, तो हम दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बन सकते हैं।" पाकिस्तान असल में इस बहाने मुस्लिम दुनिया का स्वयंभू 'नेता' और सुरक्षा का ठेकेदार बनना चाहता है, ताकि उसे फंड मिलता रहे।
क्या तुर्की और सऊदी अरब तैयार होंगे?
यही इस कहानी का सबसे बड़ा पेंच है। सुनने में यह गठबंधन अच्छा लग सकता है, लेकिन हकीकत कोसों दूर है।
सऊदी अरब खुद को इस्लामिक दुनिया का लीडर मानता है। वह कभी नहीं चाहेगा कि लीडरशिप की कमान पाकिस्तान या तुर्की के हाथ में जाए। वहीं, तुर्की खुद नाटो (NATO) का मेंबर है, तो उसका एक अलग स्टैंड है।
जानकारों का कहना है कि इन तीनों देशों के अपने-अपने स्वार्थ हैं। सऊदी अरब को सुरक्षा चाहिए, पाकिस्तान को पैसा चाहिए और तुर्की को अपना रुतबा बढ़ाना है। इन अलग-अलग मकसदों के साथ एक झंडे के नीचे आना लोहे के चने चबाने जैसा है।
भारत के लिए टेंशन वाली बात क्या है?
अब सवाल उठता है कि अगर (हाइपोथेटिकली) ऐसा कोई गठबंधन बन भी जाता है, तो भारत पर इसका क्या असर होगा?
ईमानदारी से कहें तो यह भारत के लिए चिंता का विषय जरूर हो सकता है। अगर तुर्की की ड्रोन टेक्नोलॉजी, सऊदी का तेल और पाकिस्तान की सेना एक साथ आती है, तो भारत के पड़ोस में शक्ति का संतुलन बिगड़ सकता है। पाकिस्तान इस ताकत का इस्तेमाल कश्मीर मुद्दे पर दुनिया का ध्यान खींचने या भारत पर दबाव बनाने के लिए कर सकता है।
लेकिन, अच्छी बात यह है कि भारत के रिश्ते सऊदी अरब के साथ भी बहुत शानदार हैं। सऊदी और यूएई अब भारत के बड़े बिजनेस पार्टनर हैं। वे पाकिस्तान के कहने पर भारत से अपने रिश्ते खराब नहीं करना चाहेंगे।