अमेरिका का यू-टर्न? ट्रम्प ने ईरान में तख्तापलट के सवाल पर दिया ऐसा जवाब, सुनकर यकीन नहीं होगा

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News India Live, Digital Desk : ईरान में इन दिनों जो कुछ हो रहा है, उस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं। वहां की सड़कों पर लोग उतरे हुए हैं, अपनी ही सरकार और सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) के खिलाफ नारेबाजी हो रही है। और जब भी दुनिया में कहीं ऐसा बवाल होता है, तो सबकी नज़रें सबसे पहले एक ही इंसान पर जाती हैं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर।

हम सब जानते हैं कि अमेरिका हमेशा से पूरी दुनिया में "लोकतंत्र का ठेकेदार" बनता आया है। चाहे वो इराक हो, अफगानिस्तान हो या कोई और देश, अमेरिकी राष्ट्रपतियों का रटा-रटाया जवाब होता था "हम वहां लोकतंत्र (Democracy) लाएंगे।" लेकिन इस बार डोनाल्ड ट्रम्प ने जो कहा है, उसने अच्छे-अच्छे राजनीति के पंडितों को चौंका दिया है।

सवाल सीधा था, पर जवाब टेढ़ा

हुआ यूँ कि हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान जब डोनाल्ड ट्रम्प से ईरान के मौजूदा हालात पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने ईरान की जनता का पूरा समर्थन किया। उन्होंने माना कि वहां के लोग बहुत ही बहादुर हैं और वे एक अच्छे जीवन के हकदार हैं।

लेकिन, असली ट्विस्ट तब आया जब रिपोर्टर ने उनसे सीधा सवाल किया: "क्या आप चाहते हैं कि ईरान एक लोकतंत्र (Democracy) बने?"

आमतौर पर कोई भी अमेरिकी नेता तुरंत कहता— "हां, बिल्कुल।" लेकिन ट्रम्प ने यहां एक पॉज़ लिया और जो कहा, वो काफी दिलचस्प था। उन्होंने कहा, "मैं नहीं जानता कि मैं इस शब्द (लोकतंत्र) का इस्तेमाल करूंगा या नहीं।"

जी हां, आपने सही पढ़ा। उन्होंने साफ शब्दों में लोकतंत्र की वकालत करने से गुरेज किया। उनका कहना था, "मैं बस इतना चाहता हूं कि वे (ईरानी लोग) खुश रहें, उनका देश सफल हो और उनके पास अच्छे अवसर हों।"

आखिर ट्रम्प के कहने का मतलब क्या है?

अब आप सोच रहे होंगे कि अमेरिका जैसा देश, जो लोकतंत्र का झंडाबरदार बनता है, उसका राष्ट्रपति ऐसा क्यों कह रहा है? इसे समझने के लिए हमें थोड़ा गहराई में जाना होगा।

असल में, डोनाल्ड ट्रम्प "रेजीम चेंज" (Regime Change) यानी जबरदस्ती किसी देश की सत्ता पलटने की पुरानी अमेरिकी नीति के बहुत खिलाफ रहे हैं। उन्हें लगता है कि जब भी अमेरिका ने किसी देश में घुसकर जबरदस्ती लोकतंत्र थोपने की कोशिश की है (जैसे इराक में), तो वहां हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ गए।

ट्रम्प का यह बयान इशारा करता है कि वे ईरान के मामले में सीधे तौर पर उलझना नहीं चाहते। वे चाहते हैं कि वहां जो भी बदलाव हो, वो वहां की जनता खुद लाए, अमेरिका नहीं। ट्रम्प का फोकस सिर्फ एक चीज पर है— ईरान के पास परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) नहीं होने चाहिए और वो अमेरिका के लिए खतरा नहीं बनना चाहिए। बाकी वो अपने देश को कैसे चलाते हैं, यह उनकी सिरदर्दी है।

ईरानियों के लिए क्या संदेश है?

ईरान की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे लोगों के लिए यह बयान थोड़ा कन्फ्यूज करने वाला हो सकता है। एक तरफ ट्रम्प कह रहे हैं कि "मैं आपके साथ हूं", लेकिन दूसरी तरफ वो यह वादा नहीं कर रहे कि अमेरिका वहां कोई लोकतांत्रिक सरकार बनवाएगा।

जानकार मानते हैं कि यह ट्रम्प की एक सधी हुई चाल है। वो ईरान के हुक्मरानों को यह मैसेज दे रहे हैं कि "हम तुम्हारी सत्ता गिराने नहीं आ रहे, लेकिन अगर तुमने हमारे हितों के साथ खिलवाड़ किया, तो हम छोड़ेंगे भी नहीं।"

कुल मिलाकर, डोनाल्ड ट्रम्प ने यह साफ कर दिया है कि उनका अमेरिका "दुनिया की पुलिस" बनकर हर जगह दखल नहीं देगा, बल्कि सिर्फ वहां हाथ डालेगा जहां उसे अपना फायदा या अपनी सुरक्षा ज़रूरी लगेगी।