इत्तेफाक या साजिश? जिस वक्त ईरान जल रहा था, ट्रम्प और रजा पहलवी एक ही जुबान क्यों बोल रहे थे?

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News India Live, Digital Desk : राजनीति में एक पुरानी कहावत है "वहां धुआं ऐसे ही नहीं उठता, जहां आग न लगी हो।" इन दिनों ईरान में जो हो रहा है, वो किसी आम प्रदर्शन से कहीं ज्यादा है। सड़कों पर लोग हैं, हुकूमत के खिलाफ गुस्सा है। लेकिन इस सबके बीच एक चीज़ है जिस पर बहुत कम लोगों का ध्यान गया है, और वो है डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान के पूर्व राजकुमार रजा पहलवी के बयानों का अजीब संयोग।

क्या आपने गौर किया? जैसे ही ईरान में विरोध की चिंगारी भड़की, उधर अमेरिका से डोनाल्ड ट्रम्प और इधर निर्वासन में रह रहे रजा पहलवी (Reza Pahlavi), दोनों के सुर अचानक एक जैसे हो गए। यह महज इत्तेफाक नहीं हो सकता।

ट्रम्प और पहलवी: एक ही बोली, एक ही इशारा

चलिए थोड़ा फ्लैशबैक में चलते हैं। जब 1979 में ईरान में इस्लामिक क्रांति हुई थी, तो वहां के शाह को देश छोड़कर भागना पड़ा था। उनके बेटे रजा पहलवी तभी से अमेरिका में हैं और वो लगातार ईरान में राजशाही या लोकतंत्र की वापसी की वकालत करते रहे हैं।

हाल ही में, ट्रम्प ने अपने बयानों में कहा कि "ईरान अब आज़ादी चाहता है" और "हम ईरान के बहादुर लोगों के साथ खड़े हैं।" ठीक उसी समय, रजा पहलवी का बयान आता है कि "अब समय आ गया है देश को वापस लेने का।" दोनों की भाषा में गजब की समानता है। दोनों ही मौजूदा 'इस्लामिक रिपब्लिक' को हटाकर एक नई व्यवस्था लाने की बात कर रहे हैं।

जानकार मानते हैं कि यह 'शब्दों का खेल' नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है। ऐसा लगता है जैसे ट्रम्प प्रशासन (या उनकी टीम) रजा पहलवी को एक "विकल्प" के तौर पर देख रही है।

क्या है 'प्लान बी'?

अब सवाल यह है कि आखिर प्लान क्या है? देखिये, अमेरिका को ईरान में एक ऐसा दोस्त चाहिए जो पश्चिमी देशों से नफरत न करे। मौजूदा सरकार से अमेरिका की कभी नहीं पटी। ऐसे में, रजा पहलवी अमेरिका के लिए एक 'परफेक्ट कैंडिडेट' हो सकते हैं। वो मॉडर्न सोच रखते हैं, पश्चिमी देशों के साथ उनके अच्छे ताल्लुकात हैं और सबसे बड़ी बात—ईरान की एक बड़ी आबादी, जो पुरानी पीढ़ी की कहानियों में 'शाह के दौर' को याद करती है, वो उन्हें पसंद करती है।

ईरानियों को क्या चाहिए?

ईरान के लोगों, खासकर नौजवानों में रजा पहलवी को लेकर एक 'सॉफ्ट कॉर्नर' देखा गया है। प्रदर्शनों के दौरान अक्सर "रजा शाह, रूहह शाद" (रजा शाह, तुम्हारी आत्मा खुश रहे) के नारे लगते सुने गए हैं। ट्रम्प शायद इसी नब्ज को पकड़ रहे हैं। ट्रम्प का प्लान शायद यह है कि ईरान पर बाहर से हमला करने के बजाय, वहां के अंदरूनी गुस्से को इतनी हवा दी जाए और उसे रजा पहलवी जैसा एक चेहरा दे दिया जाए, कि सत्ता परिवर्तन खुद-ब-खुद हो जाए।