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April 10 2026 03:30 pm

Iran-US War: ईरान का अमेरिका-इजरायल को खौफनाक 'सरप्राइज'! ट्रंप की 48 घंटे की चेतावनी पर पलटवार, बोले- 'बस थोड़ा इंतजार करें'

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तेहरान: मिडिल ईस्ट में 28 फरवरी से भड़की युद्ध की आग अब और भी भीषण रूप लेती जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई '48 घंटे' की अंतिम चेतावनी के बाद अब तेहरान ने चुप्पी तोड़ी है। ईरान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने अमेरिका और इजरायल को सीधे शब्दों में चेतावनी देते हुए एक 'बड़े सरप्राइज' के लिए तैयार रहने को कहा है। ईरान का दावा है कि उसके पास दुश्मन के ठिकानों की पूरी लिस्ट तैयार है और वह अपनी सोची-समझी रणनीति के तहत ही हर कदम उठा रहा है।

ईरानी अधिकारी का दावा: 'हमारे पास सरप्राइज तैयार, वक्त का पहिया घूमेगा'

लेबनान के प्रमुख 'अल-मायादीन' टेलीविजन नेटवर्क के साथ बातचीत में ईरानी सुरक्षा अधिकारी का लहजा बेहद सख्त नजर आया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायली शासन के लिए एक बड़ा सरप्राइज तैयार है और इसे अंजाम देने में बस कुछ ही समय लगेगा। अधिकारी ने यह भी तर्क दिया कि दक्षिण ईरान में अमेरिका द्वारा की जा रही सैन्य कार्रवाई वास्तव में ईरान के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है और समय का रुख पलट सकती है। उन्होंने वाशिंगटन के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया कि अमेरिका के पास ईरानी ठिकानों की सटीक जानकारी है। अधिकारी के मुताबिक, ईरान अपनी सैन्य योजना के अनुसार बिल्कुल सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।

ट्रंप की '48 घंटे' की धमकी को बताया बेवकूफी, मीडिया पर साधा निशाना

ईरान ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े संदेशों को युद्ध के मैदान की सच्चाई के बजाय महज एक 'परसेप्शन' (धारणा) बनाने की कोशिश करार दिया है। सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक, ट्रंप युद्ध के मैदान में अपनी सैन्य कमजोरियों को छिपाने के लिए अब मीडिया और कोरी धमकियों का सहारा ले रहे हैं। इससे पहले ईरानी जनरल अली अब्दुल्लाही अलीबादी ने भी ट्रंप की 48 घंटे वाली 'कयामत' की चेतावनी पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी और इसे 'बेवकूफाना' बताया था। तेहरान का मानना है कि व्हाइट हाउस की धमकियां केवल मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए हैं और इनका हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का शिकंजा, आर्थिक ठिकानों पर हमले तेज

रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को लेकर भी ईरान ने अपना रुख साफ कर दिया है। ईरानी सेना ने दावा किया है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए सबसे जरूरी इस जलमार्ग पर उनका पूर्ण नियंत्रण है। इसके साथ ही खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और इजरायल के हितों से जुड़ी आर्थिक संपत्तियों को भी लगातार निशाना बनाया जा रहा है। ईरान का मानना है कि वह अपनी 'छापामार युद्ध' (Guerrilla Warfare) की रणनीति के जरिए दुश्मन को थकाने की कला में माहिर हो चुका है। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि वाशिंगटन की रणनीति अब तक पूरी तरह विफल रही है और आने वाले समय में संघर्ष और तीव्र हो सकता है।